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योजना बंद होते ही महिला मरीज को ICU से बाहर निकाला, महिला की मौके पर मौत

Sat, 11 Nov 2017 11:03 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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रिस्पना पुल स्थित जगदंबा ट्रॉमा सेंटर में भर्ती मरीज की मौत होने पर परिजनों ने जमकर हंगामा किया। आरोप है कि चिकित्सकों और अस्पताल के स्टाफ की लापरवाही से मरीज की मौत हुई है। परिजनों ने शनिवार को अस्पताल के गेट पर शव रखकर विरोध जताने के बाद नेहरू कॉलोनी थाने में तहरीर दी है।
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मौके पर पहुंचे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के सामने उन्होंने अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही से मौत की शिकायत की। पुलिस ने पोस्टमार्टम कर शव परिजनों को सौंप दिया है।

ब्रह्मपुरी निवासी कमला देवी (60) पिछले कुछ समय से बीमार थीं। बताया जा रहा है कि महिला को खाने और बोलने में दिक्कत आ रही थी। परेशानी बढ़ने पर परिजनों ने नौ नवंबर को 108 एंबुलेंस सेवा को फोन किया।
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108 के चालक ने उन्हें रिस्पना पुल स्थित जगदंबा ट्रॉमा सेंटर में भर्ती करा दिया। दोपहर करीब एक बजे परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन को बताया कि उनके पास मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना (एमएसबीवाई) का कार्ड है।

इस पर अस्पताल ने महिला को आईसीयू में भर्ती कर लिया। अपराह्न करीब तीन बजे एमएसबीवाई बंद होने की जानकारी मिली। परिजनों का आरोप है कि इसके बाद अस्पताल कर्मचारी महिला मरीज को सामान्य वार्ड में शिफ्ट करने की बात करने लगे।

महिला को देखने कोई डॉक्टर नहीं पहुंचा

10 नवंबर को उन्होंने महिला को सामान्य वार्ड में भर्ती करा दिया। आरोप है कि इसके बाद पूरे दिन महिला को देखने कोई डॉक्टर नहीं पहुंचा। शनिवार सुबह तबीयत ज्यादा बिगड़ गई और महिला की मौत हो गई।

एमएसबीवाई बंद होने के कारण उपचार नहीं मिलने से महिला की मौत की जानकारी मिलने पर परिजन और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना के नेतृत्व में अस्पताल पहुंचे।

उन्होंने शव अस्पताल गेट पर रख धरना-प्रदर्शन किया। धस्माना ने कहा कि योजना बंद होने की जानकारी मिलते ही महिला का उपचार बंद कर दिया गया। इसके कारण ही उनकी मौत हुई। वहीं, एमएसबीवाई के तहत भर्ती मरीज के परिजनों से ढाई हजार रुपये भी वसूले गए।

परिजनों ने मामले की जांच के साथ ही अस्पताल संचालक और डॉक्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की। हंगामा बढ़ने पर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। एसीएमओ डॉ. एके सिंह ने परिजनों और अस्पताल के अधिकारियों से बातचीत की।

इसके बाद उन्होंने मरीज के उपचार से संबंधित दस्तावेजों की फोटोकॉपी कब्जे में ले ली। उन्होंने बताया कि सीएमओ स्तर से गठित कमेटी मामले की जांच करने के लिए अधिकृत होती है। वहीं, इंस्पेक्टर नेहरू कॉलोनी राजेश शाह ने बताया कि मृतका की बेटी ममता की ओर से तहरीर मिली है। तहरीर के आधार मामले की जांच की जा रही है।

दो दिन में बीमारी का जिक्र तक नहीं

108 की भूमिका पर भी सवाल
मामले में 108 की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हंगामे के दौरान कई तीमारदारों ने आरोप लगाया कि उनके मरीजों को भी 108 इसी अस्पताल में लेकर पहुंची और भर्ती करा दिया। उन्होंने कहा कि 108 को मरीज सरकारी अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब और अनजान लोगों को 108 स्टाफ जानबूझकर इस अस्पताल में भर्ती कराता है, जहां उनसे अनाप-शनाप पैसे मांगे जाते हैं।

दो दिन में बीमारी का जिक्र तक नहीं
मृतका को नौ नवंबर में दोपहर के समय अस्पताल में भर्ती कराया गया था। दो दिन बाद अस्पताल में महिला की मौत हो गई। इस दौरान अस्पताल ने उनके जो कागज तैयार किए, उसमें बीमारी का जिक्र तक नहीं किया गया था। जांच करने पहुंचे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने इस पर खासी नाराजगी और आश्चर्य जताया। उन्होंने कहा कि जब अस्पताल को यह पता ही नहीं था कि मरीज को बीमारी क्या है, तो उसका उपचार कैसे किया जा रहा था।

एंबुलेंस से आते हैं मरीज
जगदंबा ट्रॉमा सेंटर में अधिकांश मरीज सरकारी और प्राइवेट एबुलेंस वालों ने ही भर्ती कराए गए हैं। तीमारदारों ने आरोप लगाया कि अस्पताल मरीज लाने वाले एंबुलेंस चालकों को कमीशन देता है। ऐसे में वह मरीज को लाकर यहां भर्ती कर देते हैं। जब तक मरीज के परिजन पहुंचते हैं, उपचार के नाम पर हजारों रुपये का बिल बना दिया जाता है। ऐसे में मरीजों के सामने रुपये चुकाने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचता।
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एमएसबीवाई में नहीं किया उपचार

एमएसबीवाई में नहीं किया उपचार
जिस एमएसबीवाई के बंद होने के चलते उपचार नहीं मिलने से महिला की मौत का आरोप लगाया जा रहा है, दरअसल उसमें मरीज का उपचार किया ही नहीं गया। दोपहर करीब एक बजे मरीज अस्पताल पहुंचा, जबकि तीन बजे योजना बंद हुई। इस दौरान करीब दो घंटे तक अस्पताल प्रबंधन ने एमएसबीवाई में मरीज का रजिस्ट्रेशन नहीं कराया। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि पंजीकरण में समय लगता है। भर्ती करने के बाद मरीज के कागज तैयार किए जा रहे थे और इसी दौरान योजना बंद हो गई।

हमारे पास सभी कॉलर की कॉल रिकॉर्ड रहती है। हम अधिकांश मामलों में मरीज को सरकारी अस्पताल में ही भर्ती कराते हैं। जो मरीज या उनके तीमारदार प्राइवेट अस्पताल छोड़ने की मांग करते हैं, केवल उनको ही प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। इसके लिए उनसे पहले लिखित लिया जाता है। किसी एक अस्पताल में मरीज को छोड़ने का आरोप गलत है।
-मनीष टिंकू, स्टेट हेड, 108 सेवा

अस्पताल या चिकित्सकों की लापरवाही से मरीज की मौत का आरोप पूरी तरह गलत है। महिला का उपचार चल रहा था। शुक्रवार शाम तक महिला की हालत में सुधार भी हो रहा था। मरीज के उपचार में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती गई है। परिजनों के अन्य आरोप भी पूरी तरह गलत हैं।
-रविंद्र गुर्जर, चेयरमैन, जगदंबा ट्रॉमा सेंटर
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