सैनिक बाहुल्य ग्राम पंचायत सवाड़ निवासी गीता देवी के निर्विरोध ग्राम प्रधान बनने की उम्मीद पर जाति प्रमाणपत्र ने पानी फेर दिया है। एसडीएम ने नियमों का हवाला देते हुए महिला को प्रमाणपत्र देने से इंकार कर दिया है।
पढ़ें, चारधाम यात्रा पर मंडरा रही आपदा की ‘प्रेतछाया’
उनका कहना है कि महिला की जाति उसके मायके की मानी जाती है, जिसके आधार पर ही जाति प्रमाण पत्र दिया जाता है। जाति प्रमाणपत्र न होने पर वह चुनाव नहीं लड़ सकती हैं।
निवर्तमान में है वार्ड मेंबर
गीता देवी का खिलाप राम के साथ विवाह वर्ष 1992 में हुआ था। महिला निवर्तमान वार्ड मेंबर भी है। इस बार पंचायत चुनाव में सवाड़ में ग्राम प्रधान का पद अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित होने पर ग्रामीणों ने गीता को निर्विरोध प्रधान बनाने का मन बनाया।
पढ़ें, प्रेमी ने दिया धोखा तो थाने पहुंची तीन बच्चों की मां
गीता ने जाति प्रमाणपत्र बनाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन पटवारी ने प्रमाणपत्र देने से इंकार कर दिया। मामला एसडीएम तक पहुंचा, लेकिन जवाब नहीं मिला।
महिला का है कहना
गीता देवी का कहना है कि वह अपने पिता हरेंद्र राम के साथ गुवाहाटी में रहती थी। 14 वर्ष की उम्र में ही माता-पिता का निधन हो गया। वर्ष 1992 में वहीं काम कर रहे खिलाप राम से शादी होने पर वह सवाड़ गांव आ गई। अब पांच बच्चों और पति के साथ खेतीबाड़ी से गुजारा हो रहा है। ऐसे में वह मायके से कैसे जाति प्रमाणपत्र लाएं।
पढ़ें, उत्तराखंड एसआई की भर्ती पर हाईकोर्ट की रोक
सवाड़ गांव निवासी नारायण सिंह मेहरा और नरेंद्र सिंह मेहरा ने बताया कि ग्राम प्रधान का पद आरक्षित होने से महिला को निर्विरोध चुनने का मन बन रहा था, लेकिन जाति प्रमाणपत्र नहीं होने से अब दोबारा ग्राम पंचायत की बैठक कर नई रणनीति पर चर्चा की जाएगी।