देहरादून। 12 वर्ष की उम्र में पैर गंवाया। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर। फिर भी देहरादून निवासी साक्षी चौहान ने बास्केटबॉल में देश का नाम रोशन करने की ठानी। मजबूत हौसलों और कड़ी मेहनत का नतीजा रहा कि वह अंडर-22 व्हीलचेयर बास्केटबॉल में भारतीय टीम में शामिल हुई और टीम को जीत दिलाई। अब वह सीनियर व्हीलचेयर बास्केबॉल चैंपियनशिप में खेलना चाहती हैं। लेकिन आर्थिक तंगी उसकी राह में बाधा बनी हुई है।
बृहस्पतिवार को साक्षी चौहान ने बताया कि अगले महीने चेन्नई में भारतीय सीनियर व्हीलचेयर बास्केटबॉल के लिए ट्रायल होने हैं। इसमें चुनी जाने वाली टीम सीनियर वर्ल्ड व्हीलचेयर बास्केटबॉल चैंपियनशिप में खेलेगी। उन्होंने भी इस चैंपियनशिप के लिए मेहनत की है, लेकिन इसके लिए महंगी व्हीलचेयर चाहिए। इसकी कीमत 15-20 हजार रुपये है। लेकिन उनके पास इतने पैसे नहीं हैं कि वह इस व्हीलचेयर को खरीद सकें। इसके लिए उन्होंने पैरालंपिक एसोसिएशन और विभाग से मदद की गुहार लगाई है।
सड़क हादसे में कट गया था पैर
साक्षी ने बताया कि जब वह 12 वर्ष की थी उस समय सड़क पार करते समय एक वाहन की चपेट में आने से उसका एक पैर खराब हो गया था। हादसे के एक-दो साल तक उसकी जिंदगी ठहर सी गई, लेकिन उसके बाद उसने हिम्मत नहीं हारी।
गरीब परिवार से हैं साक्षी
साक्षी ने बताया कि उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। उनके पिता ट्रक चालक हैं। पैर के इलाज में काफी पैसा खर्च हुआ था। विषम हालातों में उन्होंने व्हीलचेयर खरीदी। लेकिन, अब उच्च तकनीकी व्हीलचेयर खरीदने के लिए परिजनों के पास पैसे नहीं हैं।
मामला एसोसिएशन के संज्ञान में नहीं हैं। यदि साक्षी एसोसिएशन के पास आएगी तो जरूर उसकी मदद की जाएगी।
-प्रेम कुमार, सचिव, उत्तराखंड पैरालंपिक एसोसिएशन।