औली में छोटे-छोटे बच्चे बर्फ में लकड़ी के फट्टों पर ऐसे फिसलते हैं जैसे उन्होंने स्कीइंग की ट्रेनिंग ले रखी हो।
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मगर न तो उनके पास कोई ट्रेनर है और न ही उपकरण। बावजूद इसके इनके ये गजब के कारनामें देख लोग आश्चर्य में हैं। ये बच्चे इतने माहिर हैं कि प्रशिक्षित लोग भी मात खा जाएं।
युवाओं को बताई बारीकियां
यह कहना है आईटीबीपी के माउंटेनियरिंग एंड स्की इंस्टीट्यूट औली के प्रशिक्षकों का। हिमालय की बर्फीली सीमा पर तैनात आईटीबीपी के जवान आजकल दून में युवाओं को स्कीइंग और माउंटेनियरिंग की बारीकियां बता रहे हैं।
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दरअसल परेड ग्राउंड में नॉर्दन इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में साहसिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए आईटीबीपी के माउंटेनियरिंग एंड स्की इंस्टीट्यूट का स्टॉल लगाया गया है।
यहां एडवेंचर स्पोर्ट्स के प्रति युवाओं का खासा रुझान दिखाई दे रहा है। वे जवानों से माउंटेनिंग व स्कीइंग की जानकारी ले रहे हैं।
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माउंटेनियरिंग इच्छाशक्ति को परखने का सबसे बेहतर खेल है। मगर इसके लिए दिल मजबूत होना बहुत जरूरी है। आपदा के समय आईटीबीपी ने अपने इसी हुनर से सैकड़ों लोगों को बचाया था। आईटीबीपी के जवान कभी-कभी मसूरी में आम लोगों को भी इसका प्रशिक्षण देते हैं।
- एसआई जीडी मोहन सिंह, प्रशिक्षक माउंटेनियरिंग
स्कीइंग में मजबूत दिल और नॉर्मल बीपी वाले लोगों को ही शामिल होना चाहिए। राज्य में करीब 3 महीने स्कीइंग का खेल चलता है। औली के स्थानीय बच्चे तो लकड़ी के फट्टों की मदद से स्कीइंग करते हैं। इन युवाओं को अगर प्रशिक्षण मिले तो वे आगे और बेहतर कर सकते हैं।
- हवलदार जगदीश सिंह, प्रशिक्षक स्कीइंग