विश्व प्रसिद्ध विंटरलाइन दुनिया में केवल स्विट्जरलैंड और पहाड़ों की रानी मसूरी ही नहीं, बल्कि गढ़वाल के पौड़ी और नरेंद्रनगर से भी नजर आती है। यह दावा करते हुए पर्यटन विभाग से सेवानिवृत्त अधिकारी प्रशांत नेगी ने कहा है कि प्रचार-प्रसार किया जाए तो यह प्रदेश में पर्यटन के लिहाज से काफी फायदेमंद हो सकता है।
विंटरलाइन के बारे में प्रचलित है कि यह दुनिया में सिर्फ स्विट्जरलैंड और मसूरी से ही नजर आती है। मसूरी में सरकार बाकायदा विंटर कार्निवाल भी कराती है। गढ़वाल मंडल विकास निगम के पूर्व प्रचार अधिकारी प्रशांत नेगी ने बताया कि मसूरी में पोस्टिंग के दौरान पहली बार सुना कि क्षितिज में जाड़ों में बनने वाली रंगीन खूबसूरत विंटरलाइन सिर्फ मसूरी और स्विट्जरलैंड से दिखाई देती है।
तब से पर्यटन विभाग भी यही प्रचारित करता है। उत्सुकतावश कई स्थानों पर खोज की तो पौड़ी और नरेंद्रनगर से भी विंटरलाइन दिखाई दी। नेगी का दावा है कि वह हर स्थान जो चार से पांच हजार फीट की ऊंचाई पर हो, सामने कई किलोमीटर तक फैली घाटी हो और उस घाटी में सूर्य अस्त होता हो तो ऐसी जगह पर विंटरलाइन बनती है।
इस तरह बनती है विंटरलाइन
अपने अध्ययन के आधार पर प्रशांत नेगी ने दावा किया है कि नवंबर से जनवरी और कई बार फरवरी तक जब आसमान साफ हो, हल्के बादल क्षितिज में उड़ान भर रहे हों, धूल में नमी कम हो, धूल कण ठंड से एक ऊंचाई पर जाकर जम जाएं, तो इन धूल कणों व बादलों से जब सूरज एक विशेष कोण से अस्त होते समय अपनी किरणें बिखेरता है तो विंटरलाइन बनती है।