गढ़वाल मंडल में पिछले छह दिनों से जंगल जल रहे हैं। इससे अब तक करोड़ों रुपये की वन संपदा के नुकसान का अनुमान है।
सोमवार को वनाग्नि की 17 घटनाओं में 152 हेक्टेयर वन क्षेत्र जल चुका है। इसे मिलाकर मंडल अंतर्गत पांच वन प्रभागों में अब तक वनाग्नि की 359 घटनाओं में 941 हेक्टेयर वन क्षेत्र जल चुका है। आग से आस पास के गांवों को भी खतरा बना है। वही इससे वन्य जीव भी प्रभावित हो रहे हैं। इसके बावजूद अब तक आग पर काबू नहीं पाया जा सका है। सवाल यह है कि फायर गार्ड को अब तक मानदेय नहीं मिला जो बगैर मानदेय वनाग्नि पर काबू के लिए जूझ रहे हैं।
गर्मी बढ़ते ही सोमवार को चकराता-मसूरी मोटर मार्ग पर मागटी और चुरानी छानी के पास भी देवदार और बान के जंगल धधक उठे। सुबह से यह जंगल धधक रहे हैं। एक बड़े क्षेत्रफल में खड़ी वन संपदा पूरी तरह जलकर राख हो गई। ग्रामीण केशर सिंह, सबल सिंह, चमन सिंह, अजेंद्र सिंह का कहना है कि शिकायत के बाद भी अब तक वन विभाग का कोई भी कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा है। दोपहर से ग्रामीण खुद के संसाधन पर आग पर काबू पाने के काम में जुटे हुए हैं। जल्द ही यदि आग पर काबू नहीं पाया गया तो आग आबादी क्षेत्र का रूख कर सकती है। डीएफओ दीप चंद आर्य ने कहा कि टीम को मौके के लिए रवाना कर दिया गया है।
गढ़वाल वन प्रभाग में आग से पौड़ी मंडल मुख्यालय में धुंध छाई हुई है। आग कुछ गांवों के नजदीक तक पहुंच चुकी है। सोमवार को गढ़वाल वन प्रभाग में वनाग्नि की 16 और बद्रीनाथ में एक घटना हुई। गढ़वाल मंडल आयुक्त दिलीप जावलकर ने हालांकि अधिकारियों को आग पर काबू के लिए निर्देश दिए हैं, लेकिन आग पर अब तक काबू नहीं पाया जा सका है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फायर गार्ड को अब तक मानदेय नहीं मिला। भूखे पेट आग पर कैसे काबू पाया जा सकेगा। इसके अलावा वन प्रभागों में मेन पावर की भी कमी बनी है। स्थिति यह है कि एक वन रक्षक के पास दो बीटें हैं। जबकि एक वन रक्षक अपनी ही बीट में पूरे दिन भर में ठीक से घूम नहीं सकता। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि वाहन तेल के लिए भी विभाग को इस बार अब तक पैसा नहीं मिला।
कहा कितना हेक्टेयर वन क्षेत्र जला
वन प्रभाग का नाम क्षेत्रफल हेक्टेयर में
गढ़वाल वन प्रभाग 405
सिविल वन प्रभाग 458
बद्रीनाथ वन प्रभाग 33
अलकनंदा वन प्रभाग 05
रुद्रप्रयाग वन प्रभाग 37
वन प्रभागों में लगाए गए फायर वाचर
प्रभाग का नाम क्रू स्टेशन फायर वाचरों की संख्या
गढ़वाल 43 321
सिविल एवं सोयम 30 136
रुद्रप्रयाग 27 1232
अलकनंदा 31 76
बद्रीनाथ 32 218
वन मंत्री के गांव का जंगल खाक
harak singh
प्रदेश के वन मंत्री डा. हरक सिंह रावत के गांव के जंगल सोमवार को भी आग में धधकते रहे। वहीं रविवार रात को उफल्डा, श्रीकोट गंगनाली, चमढांग सरणा, रतूड़ा, खोला, जैधार, महेंद्र, गुंठाई, पठवाड़ा, बिंदी घेरा, अर्जुन पर्वत और चौरास सहित अन्य गांवों के जंगलों में आग लगी रही। सिविल सोयम श्रीनगर के अंतर्गत अब तक लगभग 75 हेक्टेअर भूमि आग में स्वाहा हो गई है। जंगलों से निकला धुआं अलकनंदा घाटी में फैल गया है। जिससे वातावरण में धुंध छाई हुई है। लोग आंखों में जलन महसूस कर रहे हैं।
पिछले चार-पांच दिनों से पौड़ी व टिहरी जिले के जंगल आग में धधक रहे हैं। वन मंत्री हरक ङ्क्षसह रावत की ग्राम पंचायत श्रीकोट गंगानाली का जंगल भी तीन दिन तक आग में जलकर खाक हो गया है। आग में हरी वनस्पतियों के जलने से पहाडिय़ां काली दिखाई दे रही हैं। श्रीनगर-बुघाणी मोटर मार्ग पर सरणा के समीप और श्रीनगर-पौड़ी मोटर मार्ग पर उफल्डा के निकट आग बेकाबू हो गई। उफल्डा निवासी पीएस रावत ने बताया कि आग इतनी भीषण थी कि देखते ही देखते चीड़ के हरे पेड़ अंगारे बन गए। बडियारगढ़ निवासी सामाजिक कार्यकर्ता हनुमंत भंडारी का कहना है कि वन विभाग के पास आग बुझाने के लिए उपकरण नहीं है। ऐसे में कर्मी घास-पत्तियों से आग बुझाते हैं। रेंजर आरएस नेगी ने बताया कि उफल्डा में आग बुझा दी गई है। उन्होंने कहा कि यदि ग्रामीणों का सहयोग मिले और समय पर सूचना मिल जाए, तो आग को समय रहते नियंत्रित किया जा सकता है।
जंगल से जंगल जानवर बेघर
श्रीनगर। जंगलों की आग से वन्य जीव बस्तियों की ओर आने लगे हैं। हाइडिल कॉलोनी के समीप रहने वाली अनिता बिष्ट ने बताया कि रविवार रात सवा आठ बजे दो गुलदार उनकी छत पर बैठ गए। गुलदारों ने वहीं एक सुअर को भी मार डाला।
दूसरे दिन तक भी विभागीय अधिकारियों को घटना की नहीं जानकारी
घाट के सैंती-कुंतरी गांवों के जंगलों में आग लगने से लाखों की वन संपदा जलकर खाक हो गई है। लेकिन यहां वन विभाग के अधिकारियो की मुस्तैदी का आलम यह है कि अभी तक भी विभागीय अधिकारियों को घटना की कोई जानकारी नहीं है। जिसके चलते सोमवार को आग ने अब विकराल रूप धारण कर लिया है। जबकि ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय अधिकारियों को आग लगने सूचना दिये जाने के बाद भी विभागीय टीम मौके पर नहीं पहुंची है।
बदरीनाथ वन प्रभाग के वन क्षेत्र सैंती और कुंतरी के जंगलों में रविवार का अचानक आग भड़क उठी। आग ने देखते ही देखते वन क्षेत्र के बड़े हिस्से को अपनी आगोश में ले लिया। जिससे यहां जंगल का करीब आधा हैक्टेयर हिस्सा जलकर खाक हो गया है। लेकिन दूसरे दिन भी जंगल की आग को बुझाने के लिये विभाग की टीम के न पहुंचने से अब आग ने विकराल रुप धारण कर लिया है। ग्राम प्रधान सैंती दीपा देवी, सुशीला देवी, पूजा देवी, गीता देवी व मुन्नी देवी का कहना है कि आग लगने की सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दे दी गई थी। लेकिन वर्तमान तक भी टीम मौके पर नहीं पहुंची है। जिससे यहां वन क्षेत्र में पेड़-पौधों के साथ ही कई वन्य जीव जलकर खाक हो गये हैं। इधर, बदरीनाथ वन प्रभाग के डीएफओ एनएन पांडेय का कहना है कि सैंती कुंतरी के गांवों में आग लगने की सूचना नहीं मिली है। यदि जंगल में आग लगी है तो शीघ्र टीम भेजकर आग को बुझाने का कार्य किया जाएगा।
वनाग्नि से चमोली में 25 हेक्टेयर वन संपदा हुई नष्ट
wildfire
- फोटो : amarujala
चमोली जिले में वनाग्नि से अभी तक करीब 25 हेक्टेयर वन संपदा को नुकसान पहुंचा है। सबसे अधिक पोखरी क्षेत्र के जंगल आग की भेंट चढ़े हैं। यहां अधिकांश जगह चीड़ का जंगल होने से आग आसानी से लगाई जा सकती है। अभी भी कई जगहों पर ग्रामीणों में भ्रांति है कि जंगल में आग लगाने से बरसात में घास की पैदावार अच्छी होती है।
वन विभाग की ओर से सबसे ज्यादा वनाग्नि गोष्ठी भी पोखरी क्षेत्र में ही की गई, लेकिन इन गोष्ठियों का कोई असर ग्रामीणों पर होता नहीं दिख रहा है।
केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग के उप प्रभागीय वनाधिकारी अमित कंवर का कहना है कि केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग के अंतर्गत करीब 12 हेक्टेयर जंगल को नुकसान हुआ है। जंगलों को आग से बचाने के लिए दूरस्थ वन क्षेत्रों में कंट्रोल वर्निंग की गई है। आग लगने की स्थिति में तत्काल फायर लाइन खींची जा रही है। वनाग्नि को नियंत्रित करने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं।
वनाग्नि की नौ घटनाओं में 9 हेक्टेयर वन क्षेत्र हुआ स्वाह, दावानल का प्रकोप जारी
उत्तरकाशी के मध्य हिमालयी क्षेत्रों में तापमान वृद्धि के साथ ही दावानल की घटनाएं शुरू हो गई हैं। बीते कुछ समय के अंदर ही करीब नौ हेक्टेयर वन क्षेत्र वनाग्नि की चपेट में आकर स्वाह हो चुका है। वन विभाग के 1131 कर्मचारी पूरे साजो सामान के साथ आग पर काबू पाने में जुटे हुए हैं। बता दें कि इस वर्ष शीतकाल में नहीं के बराबर बारिश होने से जनपद के करीब 6 लाख 95 हजार हेक्टर वन क्षेत्र को पर्याप्त नमी नहीं मिल सकी है। जिससे फायर सीजन आते ही जगह-जगह दावानल की घटनाएं शुरू हो गई हैं। जानकारों के अनुसार वर्तमान में मौसम और दावानल के हालात वर्ष 2016 से काफी मेल खाते हैं। उस दौरान भी सर्दियों में बारिश नहीं होने से उत्तरकाशी वन प्रभाग में करीब 108 घटनाओं में 172.30 हेक्टेयर वन क्षेत्र तबाह हो गया था। ऐसे में इस वर्ष समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो जनपद की बहुमूल्य वन संपदा को भारी नुकसान पहुंच सकता है। इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2018 में अभी तक 9 हेक्टेयर वन क्षेत्र स्वाह हो चुका है। जबकि वर्तमान में भी मुखेम रेंज के मीरा कोट, पोखरी, अठाली, दिलसौड़, चामकोट आदि क्षेत्रों के जंगलों में आग लगी है। डुंडा के माजफ, डांडा, हिटाणु, पुजार आदि क्षेत्र में आग लगी है। धरासु के क्वाटा, बमंटी, कोट आदि क्षेत्रों में आग लगी है। वहीं बड़कोट के डंडाल गांव के समीप भी आग लगी हुई है।
उधर डीएम डा. आशीष चौहान ने कहा कि वन विभाग, एसडीआरएफ और राजस्व विभाग को दावानल की घटनाओं पर काबू पाने के निर्देश दिए गए हैं। अग्निशमन विभाग को भी नगर क्षेत्र के पास आग की घटना होने पर त्वरित कार्रवाई करने को कहा गया है। वहीं महिला मंगल दल एवं युवा मंगल दलों को भी पिरुल साफ करने तथा वनाग्नि पर नजर रखने को कहा गया है। जनपद में करीब 6 लाख 95 हजार हेक्टयर भूभाग में वन क्षेत्र फैला है। इसमें से करीब 76 हजार हेक्टयर भूभाग पर चीड़ के जंगल फैले हैं। वन विभाग ने बीते दस सालों के आंकड़ों एवं घटनाओं के आंकलन के बाद 30 हजार हेक्टयर वन क्षेत्र को संवेदनशील तथा 15864.78 हेक्टयर को अति संवेदनशील घोषित किया है। ग्रीष्मकालीन दावानल पर काबू पाने के लिए विभाग ने शीतकाल में 29 हजार हेक्टयर वन क्षेत्र में कंट्रोल बर्निंग की थी। लेकिन फिर भी हालात पर काबू पाना मुशकिल दिख रहा है। वर्तमान में विभाग ने पूरे जनपद में 3 मास्टर स्टेशन, 136 क्रू स्टेशन तथा 150 बेस स्टेशन स्थापित किए हैं। जबकि 1131 कर्मचारियों को 131 हैंड सेट और 2605 उपकरणों के साथ तैनात किया गया है।
उत्तरकाशी वन प्रभाग में वर्ष 2016 में 108 घटनाओं में 172.30 हेक्टेयर वन क्षेत्र जले थे। वर्ष 2017 में 4 घटनाओं में 1.90 हेक्टेयर वन क्षेत्र जले। वहीं वर्ष 2018 में 21 मई तक 9 घटनाओं में करीब 9 हेक्टेयर वन क्षेत्र जल चुका है। जबकि उत्तरकाशी, टौंस एवं बड़कोट वन प्रभाग के जंगलों में अभी भी कई जगहों पर आग लगी हुई है।
आग पर काबू के लिए मेन पावर की भारी कमी है। गढ़वाल वन प्रभाग में ही वन रक्षकों के 33 पद खाली हैं। एक वन संरक्षक के पास दो बीटों का चार्ज है। इसके अलावा फायर गार्ड व वाहन के लिए भी पैसा नहीं मिला।
-लक्ष्मण सिंह, उप वन संरक्षक
आग लगने से बांज, बुरांश, देवदार के पेड़ों को पहुंचा है नुकसान
जगलों में आग
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नई टिहरी में गर्मी बढने के साथ ही जंगलों में आग लगने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पौखाल, टिहरी और प्रतापनगर रेंज के जंगल आग से धधक रहे है। टिहरी जिले में नरेंद्रनगर, मसूरी, टिहरी डैम वन प्रभाग और टिहरी वन प्रभाग के अंतर्गत अग्निकांड की 53 घटनाएं हो चुकी है। जिससे 43.55 हेक्टेयर वन भूमि क्षेत्र में आग लगने से लाखों की वन संपदा को नुकसान पहुंचा है। जंगल में आग लगने से चीड़ के साथ ही बांज, बुरंाश, देवदार के पेड़ों को नुकसान पहुंचा है। वनाग्नि के लिहाज से जिले में नैलबागी, पौड़ीखाल, घुत्तु, मल्याकोट क्षेत्र सबसे अधिक संवेदनशील है।
घनों जंगलों के बीच उक्त क्षेत्रों के बीच गांवों की बसागत है। नई टिहरी और चंबा के बीच भौनाबागी के जंगल में आग लगने से बरासत के सीजन में सड़क किनारे लगाए गए विभिन्न प्रजाति के पौधें भी जल गए है। वनाग्नि पर नियंत्रण पाने के लिए भले ही वन विभाग ने अलग-अलग क्षेत्रों में 139 क्रू स्टेशन 568 वन रक्षक, वन दरोगा, दैनिक श्रमिक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की तैनाती की है। बावजूद इसके वनाग्नि पर नियंत्रण पाने में वन महकमा नाकाम साबित हो रहा है। वन विभाग के मास्टर कंट्रोल रूम प्रभारी बालकृष्ण सिल्सवाल का कहना कि वनाग्नि पर नियंत्रण पाने के लिए कर्मचारियों के पास फावडे, फायर टूल्स किट, हैलमेट, फेस मास्क, बु्रश हुक, दरांती,बेलचा आदि संसाधन दिए गए है।
यहां भी जल उठे जंगल
गर्मी बढ़ते ही सोमवार को चकराता-मसूरी मोटर मार्ग पर मागटी और चुरानी छानी के पास भी देवदार और बान के जंगल धधक उठे। सुबह से यह जंगल धधक रहे हैं। एक बड़े क्षेत्रफल में खड़ी वन संपदा पूरी तरह जलकर राख हो गई। ग्रामीण केशर सिंह, सबल सिंह, चमन सिंह, अजेंद्र सिंह का कहना है कि शिकायत के बाद भी अब तक वन विभाग का कोई भी कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा है। दोपहर से ग्रामीण खुद के संसाधन पर आग पर काबू पाने के काम में जुटे हुए हैं। जल्द ही यदि आग पर काबू नहीं पाया गया तो आग आबादी क्षेत्र का रूख कर सकती है। डीएफओ दीप चंद आर्य ने कहा कि टीम को मौके के लिए रवाना कर दिया गया है।
बिना कर्मचारियों के कैसे बुझेगी जंगल की आग
43327.60 हेक्टेयर वन भूमि में फैला लैंसडौन वन प्रभाग कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। वन प्रभाग में कर्मचारियों के 188 स्वीकृत पदों में से 110 पद रिक्त चल रहे हैं। इसके कारण जंगलों में धधक रही आग पर काबू पाना वन प्रभाग के लिए चुनौती बना हुआ है। वन प्रभाग की पांच रेंजों में इस फायर सीजन में अब तक आग की 17 घटनाएं हो चुकी हैं। इसमें से कोटद्वार रेंज में सबसे अधिक सात, लैंसडौन रेंज में छह, दुगड्डा रेंज में दो, लालढांग रेंज में एक और कोटडीढांग रेंज में एक आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। लैंसडौन वन प्रभाग में मुख्य रूप से शीशम व सागौन की महंगी इमारती लकड़ी पाई जाती है। आग लगने से 18 हेक्टेयर वन संपदा को नुकसान हुआ है। वन विभाग द्वारा पिछले सीजन में किया गया पौधरोपण और नए उपजे पौधे जलकर नष्ट हो गए हैं। लैंसडौन वन प्रभाग के डीएफओ संतराम ने बताया कि वन प्रभाग में कर्मचारियों की कमी चल रही है। इसके लिए आला अधिकारियों को लिखा गया है। जंगल में आग को बुझाने के लिए कर्मचारियों को अलर्ट किया गया है। जंगल में आग न लगे, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
वन कर्मी चुनाव ड्यूटी में जंगलों में आग
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बदरीनाथ हाईवे से लगे नंदप्रयाग रेंज के जंगलों में एक माह में तीसरी बार आग लग गई। सोमवार को करीब बीस से अधिक गांवों से लगे रेंज के सिविल फॉरेस्ट आग से धधकते रहे। इस दौरान जगह जगह लगी आग के आगे वन कर्मी वेवश दिखे। हालांकि कर्णप्रयाग के पास वन विभाग के कर्मी दो वनीकरणों को आग से बचाने में सफल रहे। सोमवार को नंदप्रयाग रेंज के जंगल सोनला से लेकर कपीरी के धार डुंग्री तक सुलगते रहे। इस दौरान सिलंगी, कांचुला, स्वर्का, बरसाली, मौणा, नाकोट, सहित कई गांवों के जंगलों में आग धधकती रही। मौणा, बरसाली के जंगलों में यह आग माह में तीसरी बार लगी।
यही नहीं कर्णप्रयाग के लाटूगैर और आईटीआई पास वन विभाग के वनीकरण को भी वनकर्मी बमुश्किल बचा सके। वन दारोगा एलपी नैनवाल ने बताया कई ग्रामीणों द्वारा आग लगाए जाने की सूचना है। जिन पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी। कर्णप्रयाग के पास 1-1 हेक्टेयर वाले वनीकरण को बचा लिया गया है। साथ ही स्वर्का और कांचुला में फायर लाइन काटने के लिए ग्रामीणों को कहा गया है। कई जगह कर्मियों ने फायर लाइन काटकर आग पर नियंत्रण किया। वन विभाग के कुछ कर्मी चुनाव ड्यूटी में तैनात होने के चलते भी दिक्कत हो रही है।
जनपद में वनाग्नि की 37 घटनाओं में 39 हेक्टेयर वन राख
फायर सीजन में रुद्रप्रयाग वन प्रभाग के अंतर्गत सवा लाख हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र में अभी तक वनाग्नि की 37 घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें 39 हेक्टेयर वन क्षेत्र जलकर राख हो चुका है। कई क्षेत्रों में भी बीते फरवरी से अभी तक तीन से चार बार आग लग चुकी है। बीते वर्ष बरसात के बाद से बारिश नहीं होने के चलते बीते वर्ष नवंबर माह से ही वनाग्नि की घटनाएं होनी लगी थी। लेकिन इस वर्ष फायर सीजन में प्रभागीय क्षेत्र की सभी छह रेंजों के अधिकांश जंगल वनाग्नि से धधकते रहे। विभागीय कार्यालय से मिले आंकड़ों के अनुसार रुद्रप्रयाग में सिविल क्षेत्र में 16 व वन पंचायत क्षेत्र में 21 वनाग्नि की घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें कुल 39 हेक्टेयर वन क्षेत्र जलकर राख हो चुका है। आग से वनों में बड़े पेड़ों के साथ-साथ छोटे पौधे व अन्य वनस्पितियां भी जल रही हैं।
इधर, बीते तीन दिनों से खांकरा रेंज के अंतर्गत सुनाऊं के जंगल धधक रहे हैं। यह क्षेत्र बीते फरवरी माह में भी पूरी तरह से जल चुका है। लेकिन अराजक तत्वों द्वारा क्षेत्र में दूसरी बार आग लगाई गई है, जिससे पूरे इलाके में घनी धुंध छाई हुई है। दूसरी तरफ जखोली रेंज के पिनगड़ी गांव के आसपास के क्षेत्र के जंगल वनाग्नि की चपेट में हैं। रविवार दोपहर से लगी आग से यहां कई हेक्टेयर वन क्षेत्र जलकर राख हो चुका है। शुष्क मौसम के कारण आग की लपटें तेजी से आगे बढ़ रही हैं। उधर, केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के अंतर्गत केदारघाटी के कई जंगलों भी आग की चपेट में हैं। इधर, डीएफओ मयंक शेखर झा ने बताया कि सभी रेंजों में कर्मियों को वनाग्नि की घटनाओं को लेकर सर्तकता बरतने को कहा गया है। ग्राम पंचायतों से भी सहयोग की अपील की जा रही है। बताया कि पर्याप्त बारिश के अभाव में जंगलों में नमी कमी है, जिस कारण आग तेजी से फैल रही है।