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एक घर, 7 लोग, 12 हाथी और वो खौफनाक 8 घंटे

Mon, 11 Aug 2014 03:04 PM IST
नरेश थपलियाल/ अमर उजाला, कोटद्वार
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पौड़ी जिले में जंगल से सटे एकमात्र घर के अंदर सात लोग और बाहर उत्पात मचाते बारह हाथी। पूरा परिवार एक कमरे में दुबक कर रात भर ऊपरवाले से सलामती की कामना करता रहा।
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बाहर हाथी चिंघाड़ते हुए तोड़-फोड़ मचाते रहे। आठ घंटे तक परिवार के सभी सदस्यों की सांसें अटकी रहीं। लगता रहा कि हाथी अब बस दरवाजा तोड़कर अंदर घुसेंगे और...।

घर का मुख्य दरवाजा तो हाथियों ने तोड़ ही दिया था। शुक्र है कि मुख्य द्वार के बाद एक और दरवाजा था, जहां तक हाथी नहीं पहुंचे।
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रात नौ बजे धमके हाथी सुबह पांच बजे जंगल में भागे

नौ बजे घर पर धमके हाथी सुबह पांच जंगल की ओर भागे तो सभी को लगा कि बस नई जिंदगी मिल गई।

मामला पौड़ी जिले में लैंसडौन वन प्रभाग से सटे गांव का है। ग्रास्टनगंज खाम बंगला क्षेत्र में तहसील कर्मचारी पूरण चंद्र चटर्जी के घर के बाहर शनिवार रात हाथियों का झुंड आ धमका।

हाथियों ने मुख्य दरवाजे के अलावा बाहर बने मंदिर को भी तोड़ दिया। रविवार सुबह पहुंचे अधिकारियों को सब कुछ बताते हुए पूरण चंद्र की आंखों से आंसू छलक पड़े।

'मेरे परिवार को तो भगवान ने बचाया'

पूरण चंद्र बोले, मेरे परिवार को तो भगवान ने बचाया। रात नौ बजे पूरण परिवार के छह सदस्यों के साथ घर पर थे। पत्नी और बहू खाना बना रहीं थीं।

वह और उनके दो बेटे और दो पोते दूसरे कमरे में टीवी देख रहे थे। तभी हाथी के चिंघाड़ने और पानी की टंकी फटने की आवाज से उनके रोंगटे खड़े हो गए।

दरवाजा खोलकर बाहर देखा तो पांव तले जमीन खिसक गई। बाहर 10 विशालकाय हाथी और दो उनके बच्चे खड़े थे। वह कमरे के अंदर भागे और अंदर से दरवाजे की कुंडी लगा दी।

शायद हाथियों ने उन्हें देख लिया था। इसके बाद वे और उग्र हो गए। इधर, पूरा परिवार एक कमरे में जमा होकर पुराने दरवाजों के भरोसे भगवान से कामना करने लगा।
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कुर्ते पर मिर्ची बांधी और आग लगाकर हाथियों का भगाया

दहशत के मारे जान बचाने के अलावा कोई और ख्याल आया ही नहीं। रविवार सुबह पांच बजे पूरण ने हाथियों को भगाने की कोशिश की।

उन्होंने कुर्ता उतारा, उसपर मिर्ची बांधी, केरोसिन तेल में भिगाया और आग लगाकर रोशनदान से बाहर उछाल दिया।

आग और मिर्ची के धुएं के चलते हाथी चिंघाड़ते हुए जंगल की ओर चले गए। हाथियों को जंगल की ओर जाते देख सबने ईश्वर का शुक्रिया अदा किया।
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