अज्ञात शव को अपना पति बताकर एक महिला ने इतना बड़ा फ्रॉड किया कि उसके खुलासे के बाद सब दंग रह गए। ससुरालियों और पूरे गांव के इनकार के बाद भी महिला ने जिस शव की शिनाख्त अपने पति गिरीश नौटियाल के रूप में की, अंतिम संस्कार भी कर दिया, यहां तक की सरकार से मुआवजा तक ले लिया।
हाल ही आई डीएनए रिपोर्ट के मुताबिक वह शव उस महिला के पति का था ही नहीं। चार महीने बाद हुए इस खुलासे के बाद महिला के ससुराली उस पर मुआवजे के लिए षड्यंत्र रचने का आरोप लगाकर कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
पांच महीने पहले चार जून को उत्तरकाशी से गंगोत्री जा रही बुलेरो भागीरथी नदी में गिर गई थी। हादसे में उसमें सवार भटवाड़ी ब्लाक के अढ़ाली गांव के 12 लोग नदी में बह गए थे, जिनमें 38 वर्षीय चालक गिरीश नौटियाल भी थे। गिरीश के भाई दीपक नौटियाल ने बताया कि हादसे का शिकार हुए यात्रियों को ढूंढने के लिए पुलिस ने सर्च ऑपरेशन चलाया तो एक शव बरामद हो गया, जबकि अन्य 11 शवों का पता नहीं लगा।
गिरीश के माता-पिता और भाई-बहन समेत पूरे गांव ने किया था इनकार
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ग्रामीणों के आंदोलन के बाद 10 दिन तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन में नदी से एक शव और बरामद हो गया। 12 जून को शिनाख्त के लिए पहुंचे ग्रामीणों में शामिल रजनी नौटियाल ने शव की शिनाख्त अपने पति मैक्स चालक गिरीश नौटियाल के रूप में की। वहीं गिरीश के माता-पिता और भाई-बहन समेत पूरे गांव ने उसे गिरीश का शव होने से इनकार कर दिया।
दीपक के मुताबिक इसके बाद भी रजनी इस बात पर ही अड़ी रही कि वह शव गिरीश का ही है। आखिरकार पुलिस ने रजनी की बात सच मानकर शव का पंचनामा भर रजनी को सौंप दिया। पांच महीने बाद अब जब डीएनए रिपोर्ट आई तो उसमें साफ हो गया कि वो शव गिरीश का नहीं था। इस खुलासे के बाद परिजन प्रशासन से मामले में जांच की मांग कर रहे हैं।
वहीं पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़ा होना लाजमी है कि परिवार वालों के विरोध के बावजूद बिना जांच के ही शव को महिला के सुपुर्द कैसे कर दिया गया। इस संबंध में रजनी नौटियाल से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, मगर उनसे संपर्क नहीं हो सका। उनका पक्ष मिलने पर प्रकाशित किया जाएगा।
मुआवजे के लिए षड़यंत्र रचने का आरोप
गिरीश के भाई दीपक का आरोप है कि शव के अंतिम संस्कार के बाद रजनी ने प्रशासन की ओर से मिलने वाला सारा मुआवजा ले लिया और घटना के पांचवे दिन ही अपने मायके चली गईं।
वहीं कुछ दिन बाद अपने एक साल के बेटे को भी अपने पास बुलवा लिया। वहीं गिरीश की मां मंजू नौटियाल का आरोप है कि रजनी ने उस शव की पहचान केवल मुआवजे और अन्य क्लेम के लिए ही की थी।
उन्होंने बताया कि उसी समय हमने प्रशासन से डीएनए रिपोर्ट की मांग की थी, लेकिन पुलिस ने डीएनए की जांच रिपोर्ट आने से पहले ही शव को रजनी के हवाले कर दिया। इसके बाद उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
बुआ बोली, मेर भतीजे की जान को है खतरा
नेवी में अफसर गिरीश की बहन पूजा नौटियाल का कहना है कि उनके एक साल के भतीजे की जान को खतरा है। इस बाबत उन्होंने उत्तरकाशी के एसपी और डीएम से भी शिकायत दर्ज की है। उनका कहना है कि बच्चे की सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए जाने चाहिएं या उसे हमारे सुपुर्द कर दिया जाए।
''डीएनए रिपोर्ट के हिसाब सेलाश मेरे बेटे की नहीं है। उसका डीएनए, मुझसे और मेरे बेटे के बेटे से नहीं मिला। जिसकी पहचान मेरी बहू ने अपने पति की लाश के रूप में की थी, वह किसी और का शव है। हमारी सरकार से मांग है कि गिरीश के नाम जो भी था वह उसके बेटे को दिया जाए और रजनी व उनके परिजनों के खिलाफ इस मामले में कार्रवाई की जाए।''
- मंजू नौटियाल, गिरीश की मां