फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

क्या है गंगोत्री और यमुनोत्री का विकल्प?

Thu, 22 Aug 2013 10:13 AM IST
अमर उजाला, रवींद्र थलवाल, उत्तरकाशी
विज्ञापन
विज्ञापन
गंगोत्री-यमुनोत्री यात्रा मार्गों पर चार वर्षों से प्रकृति का कहर टूट रहा है। नासूर बना भूस्खलन बार-बार यात्रा मार्गों पर ब्रेक लगा रहे हैं। इन हालातों में बीते वर्षों से छह माह का यात्रा सीजन महज दो माह में ही सिमट जाता है।
विज्ञापन


सैकड़ों गांव अलग-थलग पड़ने से दिक्कतें आ रही हैं। इस बार दो महीने से ज्यादा समय बीतने पर भी राजमार्गों पर यातायात बहाल नहीं हो पाया है। ऐसे में क्षेत्र की जनता अब वैकल्पिक मार्गों की मांग करने लगी है।

बार-बार भूस्खलन से बंद
गंगोत्री राजमार्ग चार वर्षों से धरासू से उत्तरकाशी, गंगोरी से भटवाड़ी के बीच कई स्थानों पर बार-बार भूस्खलन से बंद हो रहा है। यमुनोत्री मार्ग भी धरासू से बड़कोट के बीच अवरुद्ध हो जाता है।
विज्ञापन


इन वर्षों में आपदा से ये दोनों राजमार्ग इस कदर बदहाल हो चुके हैं कि इनके सुरक्षित आवाजाही लायक तैयार होने के आसार भी नजर नहीं आ रहे हैं।

यातायात चालू नहीं हो पाया
इस बार भी इन राजमार्गों पर दो माह बाद भी यातायात चालू नहीं हो पाया है। बावजूद सरकारी मशीनरी समस्या का स्थायी समाधान नहीं तलाश रही है।

जबकि स्थानीय जानकारों की मानें तो क्षेत्र में नासूर बने भूस्खलन क्षेत्रों को बाईपास कर इन सड़कों का विकल्प आसानी से तैयार किया जा सकता है। वैकल्पिक सड़कें बनेंगी तो न यात्रा पर ब्रेक लगेगा और न ही आबादी क्षेत्र अलग-थलग पड़ेंगे।

यह हैं यात्रा मार्ग के विकल्प
नाकुरी-गंगनानी मोटर मार्ग
सामाजिक कार्यकर्ता लोंकेंद्र बिष्ट का कहना है कि नाकुरी से छह किमी सड़क बनी है तथा चार किमी स्वीकृत है। गंगनानी से नंदगांव तक 5 किमी सड़क तैयार है। इस बीच करीब 25 किमी सड़क बनाकर यमुनोत्री के प्रमुख पड़ाव गंगनानी से गंगोत्री हाईवे के नाकुरी को जोड़ा जा सकता है।

धरासू से देवीधार तक सुरंग
उत्तरकाशी जन विकास मंच के रमेश रमोला का कहना है कि गंगोत्री हाईवे के लिए नासूर बने धरासू नालूपाणी क्षेत्र में सुरंग कारगर साबित हो सकती है। मंच ने धरासू से देवीधार तक 4.3 किमी लंबी सुरंग का ब्लू प्रिंट एवं 222 करोड़ का प्राक्कलन भी तैयार किया है।

नालूपाणी-पटारा मोटर मार्ग
पटारा गांव के मनवीर नेगी ने बताया कि नालूपाणी-पटारा तीन किमी सड़क बने तो धरासू नालूपाणी के भूस्खलन वाले हिस्से को बाईपास कर सीधे यमुनोत्री राजमार्ग के कल्डियाणी पर निकला जा सकता है। यह सड़क वर्ष 2004 से स्वीकृत पड़ी है।

कमद-अयांरकाखाल मोटर मार्ग
उत्तरकाशी-लंबगांव मोटर मार्ग के धौंतरी से कमद तक सड़क बनी है। यहां से अयांरकाखाल तक आठ किमी सड़क बने तो वह आगे बूढ़ाकेदार होते हुए केदारनाथ वाली सड़क में जुड़ जाएगी। इससे चारधाम यात्रियों को गंगोत्री से केदारनाथ पहुंचने में कम दूरी तय करनी पड़ेगी।

मनेरी-जखोल-सुक्की टॉप सड़क
क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता प्रताप रावत ने बताया कि मनेरी से जखोल, गोरसाली, नटीण, रैथल, बार्सू होते हुए सुक्की टॉप तक वैकल्पिक गंगोत्री हाईवे तैयार किया जाना चाहिए। इसमें बीच-बीच में कई किमी सड़क पहले से बनी है। इससे गंगोत्री धाम की दूरी भी करीब बीस किमी कम हो जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें