17 अगस्त से शुरू होने वाले बीसीसीआई के घरेलू सत्र के लिए उत्तराखंड की टीमों का चयन कैसे होगा, इस पर अब तक भ्रम बना हुआ है। सत्र की शुरुआत में एक माह का ही समय शेष रह गया है। अपरिहार्य स्थितियों को छोड़कर इन्हीं प्रतियोगिताओं के प्रदर्शन के आधार पर टीमों के चयन का नियम है। इसके बावजूद प्रदेश में गिनती की क्रिकेट प्रतियोगिताएं हुई हैं।
पिछले वर्ष उत्तराखंड क्रिकेट संचालन समिति का गठन घरेलू सत्र की शुरुआत से कुछ समय पहले हुआ था। पहली बार चुनी जा रही राज्य की अलग-अलग टीमों का चयन मात्र ट्रायल के आधार पर कर लिया गया। इनमें से ज्यादातर ट्रायल ओपन भी नहीं थे। इसके चलते कई प्रतिभावान खिलाड़ी शामिल नहीं हो सके। तब क्रिकेट संचालन समिति ने तर्क दिया कि प्रतियोगिताओं का कैलेंडर जारी हो चुका है। ऐसे में टीम चयन के लिए ट्रायल के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। इस वर्ष पर्याप्त समय होने के बावजूद क्रिकेट संघों ने प्रतियोगिताओं के आयोजन में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई। ऐसे में इस वर्ष भी खिलाड़ियों का चयन केवल ट्रायल के जरिये हो सकता है।
प्रदर्शन के आधार पर चयन
बीसीसीआई के नियमों के अनुसार राज्य क्रिकेट संघ घरेलू सत्र से पहले (ऑफ सीजन) में स्थानीय स्तर पर क्रिकेट प्रतियोगिताओं का आयोजन कराते हैं। इन प्रतियोगिताओं के प्रदर्शन के आधार पर अलग-अलग वर्गों की क्रिकेट टीमों का चयन किया जाता है। राज्य में अलग-अलग संघों के पास अलग-अलग वर्गों की टीम की जिम्मेदारी है। ऐसे में उन संघों को अपने-अपने वर्ग की प्रतियोगिताएं करानी थीं।
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गोल्ड कप, अंडर-14, अंडर-16 और अंडर-19 की इंटर डिस्ट्रिक्ट प्रतियोगिताएं कराई गई है। बारिश के कारण सीनियर बालकों व सीनियर बालिकाओं की प्रतियोगिताएं नहीं हो पाई हैं।
-महिम वर्मा, प्रभारी सचिव, सीएयू