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पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी बोले, साहित्य में न हो अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल

Mon, 29 Oct 2018 08:22 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, रुड़की
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प. बंगाल के गवर्नर केशरी नाथ त्रिपाठी
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पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी ने कहा कि साहित्य को साहित्य के रूप में लिया जाना चाहिए। साहित्य में अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल हो रहा है, जो गलत है। वह रविवार को रुड़की में पूर्व राज्य मंत्री निरुपमा गौड़ के आवास पर निजी कार्यक्रम में पहुंचे थे। 

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उन्होंने पत्रकारों से वार्ता करते हुए बताया कि निरुपमा गौड़ पिछले 38 सालों से लगातार उन्हें राखी भेजती रही हैं। रिश्तों की यही डोर उन्हें यहां तक लेकर आई है। साहित्यिक अंदाज में पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि दिल्ली-देहरादून स्थित क्वांटम कॉलेज के एक कार्यक्रम में उन्हें कवि के नाते बुलाया गया है।

उन्होंने कहा कि साहित्य में भाषा की मर्यादा होनी चाहिए और संतुलित भी होनी चाहिए। इस दौरान देश की सर्वोच्च जांच संस्था सीबीआई पर लगे आरोपों को राजनीति से जुड़ा मामला बताते हुए टाल गए।
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इस मौके पर पूर्व राज्य मंत्री निरुपमा गौड़, जलज गौड़, पूर्व राज्यमंत्री श्यामवीर सिंह सैनी, राखी चंद्रा, शशिकांत अग्रवाल, डा. एसके श्रीवास्तव, चंद्रकांत भास्कर, धर्मवीर पिंकी, जेेपी शर्मा, अरविंद गौतम, पवन तोमर, नितिन शर्मा और शक्ति राणा आदि मौजूद रहे।

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क्वांटम विश्वविद्यालय में साहित्या समारोह अभिव्यक्ति-2018 के आयोजन में पहुंचे मुख्य अतिथि और पश्चिम बंगाल के गवर्नर केसरी नाथ त्रिपाठी और विशिष्ट अतिथि अशोक च्रकधर ने मां शारदा के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके पहले विश्वविद्यालय के संस्थापक सदस्य श्याम सुंदर गोयल ने सभी अतिथियों का मार्ल्यापण कर स्वागत किया।

मुख्य अतिथि को क्वांटम परिवार साहित्य गौरव सम्मान पत्र भेंट किया। मुख्य अतिथि ने कहा कि विश्वविद्यालय के प्रांगण में काव्य पाठ के कार्यक्रम अब मुश्किल ही देखने को मिलता है, लेकिन क्वांटम की इस काव्यांजली ने मेरी यादों को फिर से जवान कर दिया है।

कहा कि यहां के विद्यार्थियों में गजब की प्रतिभा है। विद्यार्थियों ने जिस हौंसले और मन से लोगों को सुना है वह तारीफ के काबिल है। प्रसिद्ध हास्य कवि अशोक चक्रधर ने काव्य पाठ किया कि क्यों नहीं जीते हो, इतनी क्यों पीते हो व जागो-जागो हिंदुस्तान, करता ये मलिक मनमानी के माध्यम से क्वांटम विश्वविद्यालय के प्रांगण में मौजूद सभी मंत्रमु़ग्ध किया।

विवि के संस्थापक सदस्य श्याम सुंदर गोयल ने कहा कि क्वांटम विद्यार्थियों के चहुंमुखी  विकास और प्रगति की ओर बढ़ रहा है। इस दौरान बुद्धिनाथ मिश्र, डॉ. सरिता शर्मा, राजेंद्र राजन, रामेंद्र मोहन त्रिपाठी ने भी काव्यपाठ किया। 
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