सुबह से ही हाईवे पर बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों को रैला लगा हुआ था। जैसे जैसे दिन चढ़ा गंगा घाटों पर लोगों की भीड़ बढ़ने लगी। श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान करने के बाद मंदिरों में जाकर दर्शन किए। श्रद्धालुओं ने शहर के अपर रोड, बड़ा बाजार, मोती बाजार, सुभाष घाट समेत अन्य बाजारों में श्रद्धालुओं ने खरीदारी भी की।
उत्तराखंड के हरिद्वार में गंगा तट समेत अन्य तालाब और वैटलैंड में आने वाले राजहंस मुख्यत कजाकिस्तान से आते हैं। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के जंतु एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग के एमेरिटस प्रोफेसर डॉ. दिनेश भट्ट के शोध छात्रों की टीम प्रवासी पक्षियों की निगरानी करती है।
शोध छात्र आशीष कुमार आर्य ने बताया कि राजहंस करीब 8600 फीट ऊंचाई के हिमालयी क्षेत्रों को पार कर मंगोलिया, कजाकिस्तान, चीन, नेपाल और भूटान से शीतकालीन प्रवास के लिए भारतीय उपमहाद्वीप में आते हैं।डॉ. दिनेश भट्ट ने बताया की प्रवासी पक्षियों का पलायन करना विवशता है। लगभग 40 डिग्री उत्तरी अक्षांश से ऊपर जितने भी शीत प्रदेश हैं, वहां 5 से 6 माह तक बर्फ जमी रहती है।
इस प्रतिकूल मौसम में पक्षियों को वहां खाने पीने में काफी दिक्कतें होती हैं। उनका प्राकृतिक आवास बर्फ गिरने से बुरी तरह प्रभावित होता है। जिससे पक्षियों के पास पलायन के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं होता। यह पलायन इनके शारीरिक एवं मानसिक क्रियाओं में मौसमी परिवर्तन के असर से संभव हो पाता है। प्रो भट्ट ने बताया कि हरिद्वार समेत प्रदेश में तापमान वृद्धि होने लगी है।