राजनीतिक दबाव में राजधानी के अवैध वेडिंग प्वाइंटों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पा रही है। इतना ही नहीं इसमें सुप्रीम कोर्ट की मानीटरिंग कमेटी के आदेश तक की अवहेलना की जा रही है, जिससे पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा हो रहा है। कार्रवाई करने के नाम पर महज बहानेबाजी का खेल चल रहा है।
कार्रवाई के नाम पर टालमटोल
पिछले कई सालों से सुप्रीम कोर्ट मानिटरिंग कमेटी राजधानी में बने अवैध वेडिंग प्वाइंटों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दे रही है। इस दौरान कार्रवाई के नाम पर महज टालमटोल किया जा रहा है। कभी राजनीतिक तो कभी प्रशासनिक दबाव में कार्रवाई टाली जा रही है। इससे शहर में अराजकता वाली स्थिति हो गई है।
हालात ये हैं कि शादी और अन्य आयोजनों के दौरान सड़कों पर आम आदमी के चलने तक के लिए जगह नहीं होती। इस बीच सरकार ने 31 मई 2013 तक के लिए वेडिंग प्वाइंट को छूट प्रदान किया था।
उधर समय सीमा समाप्त होने के बाद एमडीडीए ने भी पूरी तरह चुप्पी साध रखी है। पिछले आठ माह में न तो कोई अवैध वेडिंग प्वाइंट बंद हुआ और न ही गाइड लाइन का अनुपालन किया गया।
मानक ताक पर रखे गए
भू उपयोग के खिलाफ निर्माण किया गया जितनी चौड़ी सड़क चाहिए, उतनी नहींपार्किंग के लिए पर्याप्त स्पेस उपलब्ध नहीं एमडीडीए से नक्शा स्वीकृत नहीं करायाकिस तरह की खड़ी होती है परेशानी
वेडिंग प्वाइंटों के बाहर यातायात जाम होता हैआसपास के लोगों का गुजरना मुश्किल होता है आपदा की स्थिति में हादसा होने की आशंका