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नौ माह से नहीं अपडेट पालिकाओं की वेबसाइट

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नगर पालिका हरबर्टपुर की वेबसाइट में दिखाई दे रही पूर्व पालिकाध्यक्ष वीना शर्मा की फोटो। उक्त फो? - फोटो : VIKAS NAGAR
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एक तरफ केंद्र सरकार पारदर्शिता के लिए डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने की बात कर रही है। वहीं नगर पालिका विकासनगर और हरबर्टपुर में सरकार की इस मुहिम को पलीता लग रहा है। दोनों नगर पालिकाओं की वेबसाइट बीते नौ माह से अपडेट नहीं है। जिस कारण लोगों को पालिका क्षेत्र में चल रही योजनाओं के संबंध में कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है। वेबसाइट के कई लिंक तो लंबे समय से काम नहीं कर रहे हैं। इसके साथ ही पालिका के चुनाव संपन्न हुए नौ माह से अधिक का समय व्यतीत हो चुका है। बावजूद अब भी वेबसाइट में नगर पालिका विकासनगर के पालिकाध्यक्ष हरफूल महावर और हरबर्टपुर में वीना शर्मा हैं। विकासनगर नगर पालिका की मोबाइल एप भी लंबे समय से बंद पड़ा है।
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तीन वर्ष पूर्व विकासनगर पालिका क्षेत्र में बड़ी जोर-शोर के साथ वेबसाइट को लॉच किया गया था। तब पालिका के अधिकारियों का कहना था कि वेबसाइट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया अभियान से प्रेरित है। वेबसाइट बनने के बाद कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी। छोटी-छोटी जानकारी को जनता के साथ शेयर किया जाएगा। लेकिन नौ माह से दोनों ही पालिकाओं की वेबसाइट अपडेट नहीं है। सभासदों के नाम तो वेबसाइट में ठीक नजर आ रहे हैं। लेकिन विकासनगर पालिकाध्यक्ष अब भी हरफूल महावर ही हैं। इसके साथ ही हरबर्टपुर नगर पालिका की वेबसाइट लंबे समय से अपडेट नहीं है। इस वेबसाइट में कोई लिंक भी ठीक ढंग से काम नहीं कर रहे हैं।
स्थानीय निवासी मनजीत कुमार, अभय रावत, सुमन ढौंढियाल आदि का कहना है कि वेबसाइट के अपडेट न होने से उन्हें छोटी-छोटी जानकारी के लिए पालिका कार्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है। नगर पालिका विकासनगर के अधिशासी अधिकारी भजन लाल आर्य ने कहा कि मामला संज्ञान में नहीं है। जल्द ही वेबसाइट को अपडेट किया जाएगा। इसके साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पालिका से जुड़ी हर जानकारी वेबसाइट पर डाली जाए।
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डाकपत्थर डिग्री कॉलेज की वेबसाइट भी बंद
विकासनगर। नगर पालिका क्षेत्रों के साथ ही डाकपत्थर स्थित वीर शहीद केसरी चंद राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की बेबसाइट भी लंबे समय से बंद पड़ी है। जिस कारण छात्रों को प्रवेश, परीक्षा और अन्य जरूरी सूचनाओं के लिए भी कॉलेज की दौड़ लगानी पड़ती है। सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना पहाड़ी अंचलों में रहने वाले छात्रों को करना पड़ता है।
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