उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के कारण भूस्खलन और पहाड़ दरकने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। उत्तराखंड के धारचूला में भारी बारिश के बाद चीन सीमा से जोड़ने वाले तवाघाट-लिपुलेख मार्ग पर ऐलागाड़ और कुलागाड़ के पास पहाड़ी दरक गई। इसकी वजह से दारमा, चौदास और व्यास तीनों घाटियों का जिला मुख्यालय से संपर्क कट गया है। जम्मू संभाग में अगले तीन दिनों तक भारी बारिश और भूस्खलन ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
मौसम विभाग ने पंजाब, राजस्थान, यूपी समेत सात राज्यों में 2 सितंबर तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। उत्तराखंड और पूर्वी राजस्थान के कई इलाकों में अगले सात दिनों तक भारी बारिश जारी रहने के आसार है। धारचूला में तवाघाट-लिपुलेख के साथ सोबला सड़क पहाड़ी दरकने के कारण बंद हो गई है। लगातार मलबा और बोल्डर गिरने से आवाजाही ठप बनी हुई है।
तवाघाट-सोबला सड़क पर सुवा झूला पुल के पास बोल्डर गिरने से यातायात बाधित हो गया है। एसडीएम जितेंद्र वर्मा ने बताया सड़कों को खोलने के प्रयास किए जा रहे हैं। मौसम खराब होने के चलते इस कार्य में दिक्कत आ रही है। जम्मू-कश्मीर में मौसम विभाग ने अब 2 सितंबर तक भारी बारिश के साथ भूस्खलन होने का भी खतरा जताया है। इसका सबसे ज्यादा असर जम्मू संभावग पर रहेगा। ऑरेंज अलर्ट का असर कश्मीर संभाग में नहीं होगा।
रामबन, रियासी में ढलानें अस्थिर होने से बिगड़े हालात
रामबन और रियासी में पुराने भूस्खलन क्षेत्र फिर सक्रिय हो गए हैं। सैकड़ों साल पुराने इन क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा से हालात बिगड़ रहे हैं। खासकर, नाशरी टनल से लेकर पंथ्याल तक का 20-30 किलोमीटर का क्षेत्र बेहद संवेदनशील हो गया है। जम्मू स्थित पश्चिमी हिमालय अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक और रामबन में भूस्खलन पर लंबे समय तक कार्य कर चुके रियाज मीर के अनुसार, एनएच-44 पर विकास संबंधी गतिविधियां, जैसे सड़क बनाने के लिए चट्टानों का काटा जाना, इस इलाके से एमबीटी (मेन बाउंड्री थ्रस्ट) का गुजरना, जलवायु में बदलाव और रामबन की मुरी चट्टान संरचना, ये सब मिलकर रामबन को भूस्खलन के लिए बेहद संवेदनशील बनाते हैं। चट्टानों को काटे जाने से ढलान अस्थिर हो जाती है। मिट्टी का क्षरण अधिक होता है। ऐसे में अत्यधिक वर्षा मलबे को अपने साथ बहा ले जाती है।
4 दिन बाद खुला जम्मू-श्रीनगर हाईवे
जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे को एनएचएआई ने बहाल कर दिया है। हाईवे-44 पर करीब 72 घंटों से फंसे दो हजार वाहन श्रीनगर और जम्मू के लिए रवाना हो गए हैं। एनएचएआई ने भूस्खलन संभावित क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है और भारी मशीनों को तैनात कर दिया है। बीते दिनों कई स्थानों पर भूस्खलन से हाईवे पर आवाजाही बंद थी। सबसे ज्यादा असर उधमपुर, रामबन और बनिहाल के बीच पड़ा था। 26 अगस्त को भारी बारिश से यहां सड़क का बड़ा हिस्सा तबाह हो गया था।
अमित शाह अब कल जाएंगे जम्मू
जम्मू संभाग में बाढ़, भूस्खलन एवं बादल फटने से प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह अब सोमवार को जम्मू आएंगे। वह सुबह 10:45 बजे से प्राकृतिक आपदा से प्रभावित इलाकों कटड़ा, रियासी, रामबन, कठुआ, चिशोती का हवाई निरीक्षण करेंगे। इसके बाद सुबह 11:30 बजे राजभवन जम्मू में उच्च स्तरीय बैठक करेंगे। पहले अमित शाह के रविवार की शाम सात बजे जम्मू पहुंचने की सूचना थी। बताया जा रहा है कि कुछ बदलाव होने के चलते अब वह सोमवार को जम्मू पहुंचेंगे।
पंजाब में बीएसएफ ने हेलिकॉप्टर से गिराए राशन के हजारों पैकेट
पंजाब के बाढ़ प्रभावित जिलों में बीएसएफ जवान दिन-रात विशेष अभियान चलाकर लोगों को बचाने में जुटे हैं। बीएसएफ ने शनिवार को हेलिकॉप्टर से प्रभावित क्षेत्रों में राशन के हजारों पैकेट गिराए गए। रावी दरिया में उफान के कारण दर्जनों गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। रमदास, अजनाला, गग्गोमाहल, कक्कड़ घोनेवाल गांवों में चार-चार फीट पानी आ चुका है।