मानसून की बारिश यमुनोत्री एवं गंगोत्री हाईवे समेत विभिन्न मोटर मार्गों पर भारी पड़ने लगी है। मंगलवार रात से विभिन्न हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी रहने से दोनों हाईवे सहित कई संपर्क मोटर मार्ग बाधित हो गए हैं।
मंगलवार रात को हुई बारिश से यमुनोत्री हाईवे ओजरी डबरकोट में भूस्खलन से बाधित हो गया था। बुधवार को एनएच के कर्मचारियों ने मलबा साफ कर सुबह दस बजे यातायात बहाल किया। एनएच के जेई संदीप बिष्ट ने बताया कि ओजरी डबरकोट वाले हिस्से में मलबा हटाकर हाईवे खोलने के बावजूद पहाड़ी से भारी बोल्डर गिरने का खतरा बना हुआ है।
इधर, गंगोत्री हाईवे भी स्वारीगाड, डबराणी एवं गंगनानी के पास भूस्खलन से अवरुद्ध हुआ। बुधवार सुबह बीआरओ ने इन स्थानों पर आवाजाही सुचारु की, लेकिन दोपहर में गंगोत्री हाईवे नेताला के पास भारी मलबा आने से अवरुद्ध हो गया। इस हिस्से में मलबे में एक कार भी फंस गई। बीआरओ के जवान यातायात बहाली में जुटे हैं, लेकिन समाचार लिखे जाने तक यहां वाहनों की आवाजाही ठप पड़ी है।
इसके अलावा गंगोरी-संगमचट्टी, भुक्की-कुज्जन, ज्ञानसू-साल्ड आदि संपर्क मोटर मार्ग भी भूस्खलन से अवरुद्ध हुए। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल ने बताया कि बारिश में भूस्खलन से हाईवे समेत अन्य मोटर मार्ग भी अवरुद्ध हुए हैं।
पिथौरागढ़ जिले में बारिश का कहर जारी है। मूसलाधार बारिश ने आपदाग्रस्त बंगापानी क्षेत्र में फिर व्यापक नुकसान पहुंचाया है। मलबे से एक होटल दब गया है। वहीं, नाले में एक बाइक बह गई, जबकि दो वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। लुम्ती गांव में भी कई मवेशी नदी में बह गए। हालात देख लोग सहमे हुए हैं।
पिथौरागढ़ की लाइफ लाइन पिथौरागढ़ घाट सड़क तीन स्थानों पर मलबा आने से बंद हो गई है। इसके अलावा 20 से अधिक सड़कों में मलबा आया है। टनकपुर-पिथौरागढ़ नेशनल हाईवे भी आठवां मील और चल्थी में मलबा आने से सुबह से बंद है।
आठ सालों से भूस्खलन की जद में आए नैल गांव के दुवियाण तोक के कई मकानों में दरारें पड़ गई हैं। साथ ही कई ग्रामीणों की जमीन भी भूस्खलन की चपेट में आ गई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से भूस्खलन क्षेत्र के स्थायी ट्रीटमेंट की मांग की।
पोखरी ब्लॉक के दुवियाणा तोक में 32 परिवार रहते हैं। यहां साल 2012 में भूस्खलन शुरू हुआ था। तब से लगातार हर बरसात में भूस्खलन का दायरा बढ़ता जा रहा है। एडवोकेट देवेंद्र राणा, शिशुपाल सिंह, श्रीचंद सिंह, महिताब सिंह, ताजबर सिंह, संदीप आदि ने कहा कि लोग खतरे के साए में जी रहे हैं फिर भी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।
उधर लगातार बारिश होने से गुडम ग्राम पंचायत के कुलेंडू गांव के ऊपर भूस्खलन होने से गांव खतरे की जद में आ गया है। सते सिंह, सत्येंद्र सिंह देवेंद्र सिंह का कहना है कि गांव में हर समय खतरे की आशंका बनी रहती है। नैल के ग्राम प्रधान संजय रमोला, क्षेत्र पंचायत सदस्य संतोष नेगी, गुडम के प्रधान सज्जन सिंह ने शासन प्रशासन से तत्काल सुरक्षा के उपाय करने की गुहार लगाई। क्षेत्र के राजस्व उपनिरीक्षक विजय कुमार का कहना है कि दोनों जगहों पर हो रहे भूस्खलन की रिपोर्ट प्रशासन को भेज दी है।
उफान पर आया नाला, घरों में घुसा पानी
बारिश से पोखरी गांव के पास से बहने वाला नाला उफान पर आ गया, जिससे नाले का पानी भुवनेश्वरी देवी और कांता भट्ट सहित अन्य लोगों के घरों में घुस गया। रात को ही ग्रामीणों ने पत्थर आदि लगाकर नाले के पानी का बहाव कुछ हद तक मोड़ दिया। बारिश के पानी से लोगों का सामान खराब हो गया। पोखरी के राजस्व उपनिरीक्षक मनोज बर्तवाल ने मौके पर पहुंचकर नुकसान का जायजा लिया। कहा कि नुकसान का शीघ्र ही मुआवजा दिया जाएगा।
जलकुर नदी में बहने से किशोर की मौत
अतिवृष्टि से जलकुर नदी में आए उफान में बहने से भड़कोट गांव के एक किशोर की मौत हो गई। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल ने बताया कि बुधवार शाम साढ़े पांच बजे भड़कोट गांव के पास से एक किशोर के जलकुर नदी में बहने की सूचना मिली थी। जिला मुख्यालय से तत्काल एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीम मौके पर भेजी गई। बताया जा रहा है कि भड़कोट निवासी चंदन सिंह पोखरियाल का 13 वर्षीय पुत्र नरेश पोखरियाल अतिवृष्टि से जलकुर नदी में आए उफान में बह गया। काफी खोजबीन के बाद उसका शव सटियाली धार के पास से बरामद कर लिया गया है।