केंद्र के जल संसाधन मंत्रालय की तर्ज पर प्रदेश में भी जल संसाधन विभाग बनेगा, जिसमें सिंचाई और लघु सिंचाई सहित इससे संबंधित विभागों को शामिल किया जाएगा।
प्रदेश के सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने इस संबंध में विभाग के अधिकारियों को प्रस्ताव बनाने का निर्देश दिया है। हालांकि इस प्रस्ताव को कर्मचारी संगठनों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि इससे कई अधिकारियों और कर्मचारियों की वरिष्ठता प्रभावित होगी।
त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रदेश में विभागों की संख्या कम करने की योजना बनाई है। सरकार की योजना विभागों की संख्या 70 से घटाकर 24-25 करने की है। इसके लिए एक तरह के विभागों का एकीकरण किया जाएगा। सरकार कृषि और उद्यान विभाग का एकीकरण करने की योजना का पहले ही एलान कर चुकी है। अब सिंचाई और लघु सिंचाई विभाग के एकीकरण का प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया गया है। सिंचाई और लघु सिंचाई विभाग का कार्य लगभग एक जैसा है।
सिंचाई विभाग नहरों का निर्माण एवं रखरखाव, नलकूपों का निर्माण, बाढ़ सुरक्षा और जल विद्युत परियोजनाओं के निर्माण का कार्य करता है। वहीं लघु सिंचाई विभाग पर्वतीय जनपदों में गूलों के माध्यम से सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराता है। इन दोनों विभागों का एकीकरण करने की बात 2001-02 में चली थी, लेकिन इसको अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका था। एक बार फिर से दोनों विभागों के एकीकरण की बात शुरू हो गई है। सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज तो जल संसाधन विभाग में जलागम को भी शामिल करने के पक्ष में हैं।
प्रदेश सरकार की योजना विभागों की संख्या कम करने की है। इसके मद्देनजर सिंचाई, लघु सिंचाई और जलागम विभाग को मिलाकर जल संसाधन विभाग बनाया जाएगा। इसका फायदा यह होगा कि दो विभाग एक ही तरह के कार्य नहीं करेंगे। विभाग के कामकाज में भी सुधार आएगा।
- सतपाल महाराज, सिंचाई मंत्री
शासन में दोनों विभागों जिम्मेदारी एक ही अधिकारी पर
शासन स्तर पर भी सिंचाई और लघु सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव की जिम्मेदारी एक ही अधिकारी के पास है। दोनों विभागों के अपर सचिव भी एक अधिकारी हैं।