राजधानी दून में लोगों को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसाने वाली मोबाइल कंपनियों को ‘सरकारी’ शह मिल रही है। डालनवाला क्षेत्र में पेयजल लाइन तोड़ने पर जल संस्थान ने मुकदमा दर्ज कराया था।
यह मुकदमा गुपचुप तरीके से खारिज कर दिया गया। यह किसके इशारे पर हुआ? इसके जवाब में पुलिस और जल संस्थान एक दूसरे की ओर इशारा कर रहे हैं।
पानी की दुश्मन बन चुकी मोबाइल कंपनियों का आतंक पूरे शहर में है। जलसंस्थान को बिना सूचना दिए ही जगह-जगह खुदाई कर दी जाती है।
इस दौरान अक्सर पेयजल लाइन टूटने से संबंधित इलाके में पानी का संकट खड़ा हो जाता है।
अमर उजाला ने मामले की पड़ताल की
अमर उजाला ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया तो जल संस्थान ने डालनवाला क्षेत्र से जुड़े मामले में एक कंपनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। लेकिन, यह महज दिखावा साबित हुआ। अमर उजाला ने इस मामले की पड़ताल की तो पता चला कि मुकदमा वापस हो चुका है।
पुलिस के अनुसार
जल संस्थान ने एक मोबाइल कंपनी के खिलाफ एफआईआर कराई थी। तब हमने कंपनी की मशीन और ट्रॉली जब्त कर ली थी। लेकिन बाद में जल संस्थान ने आगे की कार्रवाई से इंकार कर दिया। ऐसे में कंपनी का सामान छोड़ना पड़ा।
जल संस्थान का कहना था कि कंपनी ने सब सही कर दिया है और अब कंपनी को लेकर कोई आपत्ति नहीं है। यदि संस्थान कार्रवाई वापस ना लेता तो मामला कोर्ट में जाता। कंपनी पर जुर्माना तो लगता ही साथ में सजा भी हो सकती थी। - अनिल जोशी, इंस्पेक्टर डालनवाला
जल संस्थान का पक्ष
एक महीने पहले जल संस्थान की ओर से मोबाइल कंपनी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। जहां तक रिपोर्ट वापस लेने या कार्रवाई नहीं किए जाने की बात है तो संस्थान की ओर से ऐसा कुछ नहीं किया गया। यदि ऐसा ही करना होता तो संस्थान भला रिपोर्ट कराता ही क्यों।
पता नहीं कि पुलिस वाले ऐसा क्यों बोले रहे हैं। संस्थान चाहता है कि ऐसी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई हो ताकि लोगों को परेशानी ना झेलनी पड़े। -एसके जैन, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान
डालनवाला क्षेत्र में हंगामा होने के बाद पुलिस थाने में कंपनी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इसके बावजूद डालनवाला सहित खुड़बुड़ा, तिलक रोड आदि क्षेत्रों में खुदाई जारी है। अब प्रशासन स्तर से इस दिशा में कार्रवाई कराई जाएगी, ताकि लोगों को परेशानी न झेलनी पड़े।
- राजकुमार, विधायक, राजपुर
जल संस्थान ऐसे मामलों में सिर्फ केस ही दर्ज करा सकता है। ऐसा किया भी गया। इसके बावजूद मोबाइल कंपनियां अपनी मनमानी पर उतारू हैं। कई बार हिदायत दी जा चुकी है, लेकिन कंपनियां खुदाई से पहले सूचना नहीं देतीं। - एसके गुप्ता, महाप्रबंधक, जल संस्थान