मुख्यमंत्री हरीश रावत की फ्लैगशिप योजनाओं में सबसे अहम वर्षा जल संरक्षण के लिए अभी गड्ढे नहीं खुद पाए हैं। मानसून से पहले वन क्षेत्रों में गड्ढों, ट्रेंच के अलावा एक हजार जलाशय बनाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अभी तक जलाशयों के लिए कितने गड्ढे खोदे गए रिपोर्ट शासन को नहीं मिली है। मानसून की आहट मिलने के बाद शासन ने विभाग से ब्यौरा तलब करना शुरू कर दिया है।
मृदा और वर्षा जल संरक्षण के लिए वर्ष 2015-16 में कैंपा की मद से विभाग को 11 करोड़, 88 लाख, 95 हजार रुपये के बजट का प्रावधान किया गया था। इसमें से नौ करोड़, 51 लाख, 20 हजार जारी कर दिए गए थे। इसमें चेक डैम, ट्रैंच आदि के लिए पांच करोड़, 69 लाख रुपये दिए गए, जल कुंडों, चाल-खाल आदि के लिए दो करोड़ दो लाख और जलस्रोतों को दुरुस्त करने व संरक्षण के लिए नौ करोड़, 51 लाख रुपए कैंपा मद से आवंटित किए गए।
अभी सर्वे रिपोर्ट तक नहीं
वर्षा जल संचयन के लिए खोदे जाने वाले गड्ढों की प्रगति बहुत सुस्त है। हालत यह है कि अभी तक इन कार्यों की सर्वे रिपोर्ट तक नहीं आई है। वन प्रभाग ने अपने प्रस्तावों के लिहाज से लक्ष्य पूरा नहीं किया। वर्षा जल संचयन मुख्यमंत्री फ्लैगशिप योजनाओं का सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य है।
वर्षा जल संचयन के अलावा एक हजार जलाशय जंगल की आग और वन्य जीवों को पेयजल उपलब्ध कराने की योजना विभाग ने बनाई थी। उधर, वन मंत्री दिनेश अग्रवाल ने अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि मौके पर जाकर कार्य की प्रगति का स्थलीय निरीक्षण करें। समय सीमा के अंदर जलाशय बनाने का कार्य पूरा किया जाए।