बिना पूर्व सूचना के हरिद्वार के गंगाघाटों पर अचानक पानी बढ़ने से अर्द्धकुंभ मेले के निर्माण कार्यों में लगे लोगों में भगदड़ मच गई। मजदूर एवं मिस्त्री सामान और चालक मौके पर जेसीबी, ट्रैक्टर ट्रालियां छोड़कर भाग निकले। इस दौरान कई निर्माण कार्य भी बहे गए। अनुमानित 1500 क्यूसेक जल आने से घाटों पर दिनभर निर्माण कार्य बंद रहे। लाखों रुपये का नुकसान होने पर मेलाधिकारी ने पशुलोक से बिना सूचना के जल छोड़ने पर जांच के आदेश दे दिए हैं।
इन दिनों हरिद्वार में अर्द्धकुंभ मेले के निर्माण कार्य जोरशोर से चल रहे हैं। बुधवार सुबह करीब आठ बजे ऋषिकेश स्थित पशुलोक बैराज से बिना पूर्व सूचना के पानी छोड़ दिया गया। अचानक पानी आने से हर तरफ अफरातफरी मच गई। हरकी पैड़ी की विस्तार योजना में कांगड़ाघाट पर बनाए गए सीमेंट व कंक्रीट के ब्लॉक धुल गए। घाटों की सीढ़ियों पर लगाई गई टाइल्स और पत्थर भी गंगा की भेंट चढ़ गए।
सूचना मिलते ही मेलाधिकारी एसए मुरुगेशन ने उत्तरी गंग नहर, सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश के अधिकारियों से संपर्क कर घाटों पर पानी आने का कारण पूछा।
बिना किसी सूचना के छोड़ दिया बैराज से पानी
बताया गया कि पशुलोक बैराज से चीला पावर हाउस को जाने वाली नहर को उत्तराखंड सिंचाई विभाग ने बंद कर दिया है। इससे चीला नहर का पानी गंगा में छोड़ा गया है। यह पानी भागीरथी बिंदु (भूपतवाला) से हरकी पैड़ी को आने वाली गंगा की अविछिन्नधारा से घाटों पर पहुंच गया। मेलाधिकारी ने बिना सूचना पर पानी छोड़ने पर नाराजगी जताई।
इनका है कहना
हरकी पैड़ी के सामने भीमगोडा बैराज से पशुलोक से छोड़े गए पानी को गंगा में पास नहीं किया जाता तो अधिक नुकसान होता। हरकी पैड़ी पर भागीरथी बिंदु से पानी आया है। भविष्य में भी इसका खतरा बना रहेगा। इसके बारे में हमने पहले से ही उत्तराखंड सिंचाई विभाग, मेलाधिकारी और जिलाधिकारी को पत्र भेजकर अवगत करा दिया था। जिस प्रकार अविरलधारा की खुदाई की गई है उससे कभी भी हरकी पैड़ी पर अतिरिक्त पानी आने से खतरा होगा क्योंकि भागीरथी बिंदु ओपन सप्लाई चैनल है। उस पर गेट नहीं है इसलिए बेहिसाब खुदाई नहीं करने के लिए कहा गया था। लेकिन किसी ने नहीं सुना।
-सुशील यादव, सहायक अभियंता, उत्तरी खंड गंगनहर हैडवर्क्स।
पानी ने घाट पर निर्माण कार्य किया बरबाद
भागीरथी बिंदु से अचानक हरकी पैड़ी पर पानी आने से कांगड़ा घाट पर सीमेंट कंक्रीट के ब्लाक बनाने और पुलों पर जो काम चल रहा था वह बाधित हो गया है। कांगड़ाघाट पर डायवर्जन बनाया गया था उसको भी अब दोबारा बनवाना होगा। कई स्थानों पर पानी भर गया है। इसे खाली करने के बाद ही काम शुरू हो पाएगा। पानी आने से सीमेंट कंक्रीट के जो ब्लॉक बनाए जा रहे थे उनका और घाटों पर मरम्मत का जो काम किया गया उसका नुकसान हुआ है।
-डीएस कछवाहा, अधिशासी अभियंता, सिंचाई खंड, हरिद्वार।
पानी छोड़े जाने से पूर्व सूचना दी जानी चाहिए थी। इसे गंभीरता से लिया गया है। ऐसे व्यवस्था की जाएगी की भविष्य में ऐसा फिर न हो पाए। पानी छोड़ने से पूर्व मेलाधिष्ठान और गंगाघाटों पर लोगों की इसकी पूर्व सूचना देने की व्यवस्था होनी चाहिए। बिना सूचना के पशुलोक से पानी क्यों छोड़ा गया इसकी जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
-एसए मुरुगेशन, मेलाधिकारी अर्द्धकुंभ
...तो होती अनहोनी
गनीमत रही की पानी में करंट नहीं फैला, वरना बड़ी अनहोनी हो सकती थी। अचानक पानी आने से सिंचाई विभाग ही नहीं मेलाधिष्ठान में हड़कंप मच गया।