भारतीय मृदा एवं जल अनुसंधान संस्थान में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में विशेषज्ञों ने जल स्त्रोतों के संरक्षण और संवर्द्धन की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि पहाड़ में अलग-अलग कारणों से बड़ी संख्या में प्राकृतिक जल स्त्रोत सूख रहे हैं। अगर जल्द ही इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो बड़ी संख्या में जल स्त्रोत खत्म हो जाएंगे।
शुक्रवार को केंद्रीय भूमि जल बोर्ड के तत्वावधान में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। संस्थान के निदेशक डॉ. पीके मिश्रा और क्षेत्रीय निदेशक अनुराग खन्ना ने संयुक्त रूप से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। विशेषज्ञों ने जलस्त्रोतों के पुनर्जीवन, उनके संरक्षण और संवर्द्धन की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि पहाड़ में कुछ समय पहले तक जल संकट बहुत कम होता था। लेकिन अब कई इलाकों में गंभीर जल संकट बना रहता है। पहाड़ में सड़कों के निर्माण के लिए होने वाले विस्फोट समेत तमाम अन्य कारणों से पानी रिसता है, जिससे जल स्त्रोत सूख रहे हैं।
उन्होंने वर्षा जल के संग्रहण पर फोकस करने पर जोर दिया। इस दौरान अनुराग खन्ना, संयोजक डॉ. मुरगानंदम और डॉ. डीआर सेना ने भी विचार रखे। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों व विश्वविद्यालयों के 70 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस अवसर पर रवि कल्याण, अमनदीप कौर, विकास तोमर, देवस्पति जमलोकी, गणेश बर्त्वाल समेत अन्य अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।