दो लाइफ लाइन
पौड़ी जिला मुख्यालय में लोगों ने बातचीत की तो बताया कि पानी आपूर्ति में राहत बरसात के समय ही रहती है। पौड़ी में 50 लाख लीटर पानी की जरूरत है, जबकि आपूर्ति 30 लाख लीटर प्रतिदिन हो पा रही है। यहां पर पानी पहुंचाने के लिए मुख्य रूप दो लाइफ लाइन हैं। एक 30 किमी दूर से श्रीनगर से पेयजल लाइन और दूसरी नानघाट परियोजना। नानघाट परियोजना के तहत करीब 80 किमी दूर से पानी पहुंचाया जाता है। नानघाट परियोजना के स्रोत में भी पानी कम हुआ है। इन परियोजनाओं के पेयजल लाइन के टूटने, बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण भी कई बार आपूर्ति बाधित होती है। पौड़ी के ही सफरदखाल, कोट, डांडा नागराज, चमोली क्षेत्र में भी समस्या है।
खिर्सू पानी बोर्डिंग लग्यूंच निरपाणी का डांडा...
खिर्सू गवाड़ जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। वहां पर हमें लोग पानी के लिए भटकते मिले। यहां पर गृहणी ज्योति और प्रिया पानी ढोती मिलीं। उन्होंने बताया कि तीन दिन से पानी नहीं आ रहा है। एक ही स्रोत है उससे पानी लेने के लिए जा रहे हैं, जो आधा किमी दूर है। इसी तरह कई महिलाएं फॉरेस्ट की हाईटेक नर्सरी से लेकर दूसरी जगहों पर पानी मिलने की उम्मीद से बर्तन लिए भटकती दिखीं। स्रोत के पास मिली किरण देवी और सरोजनी देवी बताती हैं कि यह स्थिति कई दिनों से है, यह स्रोत ही एक मात्र सहारा है। कई और गांव से भी लोग पानी लेने के लिए पहुंचते हैं। खिर्सू की कमलेश देवी कहती हैं कि हालत यह है कि जल संकट को लेकर गीत भी बन गए हैं। यहां पर आवासीय राजकीय इंटर कॉलेज खुला था, तो हास्टल बन गया। पानी नहीं था... ऐसे में एक गीत बना खिर्सू पानी बोर्डिंग लग्यूंच निरपाणी का डांडा..।
यहां पर भी दिक्कत
लैंसडौन भी विख्यात पर्यटन स्थल है, यहां पर दो एमएलडी पानी की कमी है। इससे स्थानीय लोगों के साथ पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी तरह रिखणीखाल में करीब दो एमएलडी की कमी है। थलीसैंण में भी दिक्कत है। वहीं, श्रीनगर से जुड़े चौरास नैथाड़ा, अगरी पट्टी, बडियार जैसे क्षेत्रों में पेयजल किल्लत है। यहां पर प्रति व्यक्ति एक दिन में 135 लीटर पानी की जरूरत है, जबकि 55 लीटर तक पानी उपलब्ध हो पा रहा है। नैनी डांडा ब्लाॅक के लोग भी बेहतर पेयजल आपूर्ति का इंतजार कर रहे हैं।
सबसे कम बारिश, जल स्रोत संकट में
पौड़ी पर मौसम की मार भी पड़ी है, राज्य के कई जिलों में औसत से अधिक बारिश हुई है, वहीं पौड़ी जिले में औसत से कम बारिश हुई है। मौसम विभाग के अनुसार पिछले वर्ष पौड़ी जिले में औसत बारिश 30 प्रतिशत कम हुई है। 1989 से 2018 तक जनपदवार बारिश का रुझान भी मौसम विभाग ने पता किया था, उसमें भी पौड़ी जिले में मासिक और वार्षिक बारिश में कमी की बात कही गई है। वहीं, स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवेनेशन अथॉरिटी (सारा) के आंकड़े भी बताते हैं कि राज्य में पौड़ी जिला दूसरे नंबर पर है, जहां पर सर्वाधिक जल स्रोत सूख रहे हैं, जिनकी संख्या 664 है। यह वह आंकड़ा है, जो सरकारी कागजों में है, ऐसे स्रोतों की संख्या और अधिक हो सकती है।
हर तीसरी समस्या पानी से जुड़ी
जिला प्रशासन के पास हर तीसरी शिकायत पानी से जुड़ी पहुंच रही है। जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया बताती हैं कि इसमें जल संकट के साथ कुछ पानी वितरण को लेकर आपसी शिकायत भी शामिल है। पानी की समस्या को दूर करने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। 45 करोड़ की अलकनंदा से पानी पहुंचाने की योजना है, जिस पर काम चल रहा है। सारा के साथ मिलकर जलस्रोतों को पुनर्जीवन का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही गर्मियों के तीन महीने प्रत्येक जल संस्थान के जेई की कम से हर दिन तीन गांव का दौरा करने, शिकायत सुनने और समाधान करने का निर्देश दिया गया है, इसकी लगातार निगरानी की जा रही है।
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परियोजना का खाका खींचा गया
सिंचाई विभाग ने पौड़ी जिले में कई परियोजनाओं का खाका खींचा है। सिंचाई विभाग के विभागाध्यक्ष सुभाष कुमार बताते हैं कि सतपुली बैराज की योजना पर 2027 तक काम पूरा होने की संभावना है। इसमें सिंचाई, पेयजल और पर्यटन तीनों को दृष्टिगत रखते हुए तैयार किया जा रहा है। सतमुंडा और स्यूंसी परियोजना के लिए भी विभागीय प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
नयार नदी पर सर्वाधिक परियोजनाएं
अगर जिले की बात करें तो नयार नदी सबसे महत्वपूर्ण साबित हो रही है। जल निगम के अधीक्षण अभियंता व जल जीवन मिशन के नोडल अधिकारी मो. मिशम बताते हैं कि करीब 22 पंपिंग योजनाओं में करीब 14 परियोजनाएं नयार नदी से जुुड़ी हैं। जल संकट को दूर करने के लिए 21 योजनाएं बनाई गईं, इनमें 17 पूरी हो चुकी हैं। पांच के पूरा होेने पर करीब 240 गांवों में पेयजल आपूर्ति और बेहतर होगी। खिर्सू में बिडौली परियोजना के पूरी होने पर 80 गांवों को लाभ होगा। यहां पर काम अस्सी प्रतिशत पूरा हो चुुका है। साथ ही जहां पर जलस्रोतों में भी पानी कम हो रहा है, वहां पर पहले से ही नई योजना बनाकर जोड़ने का निर्देश शासन से दिया गया है।