वाटर सेंक्चुअरी प्रोजेक्ट के तहत वैज्ञानिकों की नजर 12 हिमालयी राज्यों के तीन लाख से अधिक छोटे-बड़े जलस्रोतों पर है। टीमें उन जलस्रोतों को चिह्नित कर रही है जिन्हें वाटर सेंक्चुअरी के तौर पर विकसित किया जा सकता हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि हिमालयी राज्यों में औसतन 50 फीसदी जलस्रोत ऐसे हैं जिन्हें वाटर सेंक्चुअरी के तौर पर विकसित किया जा सकता है।
चंपावत के 600 गांवों और अल्मोड़ा के 250 गांवाें की जियोमैपिंग
परियोजना के तहत चंपावत के 600 गांवों और अल्मोड़ा के 250 गांवों की जियोमैपिंग की जा चुकी है। इसके माध्यम से जलस्रोतों का डाटा तैयार किया जा रहा है। जबकि योजना के अगले चरणों में हिमालयी राज्यों के सभी जिलों की जियो मैपिंग कराई जाएगी।
राज्य के 22 विकासखंडों में पानी का संकट
जीपी पंत संस्थान के वैज्ञानिकों की ओर से किए गए हालिया शोध में यह बात सामने आई है कि उत्तराखंड के 22 विकासखंडों में पानी का संकट है। इसके लिए समय रहतेे कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति अनियंत्रित हो जाएगी। वैज्ञानिकों के मुताबिक पौड़ी और अल्मोड़ा जिले में पानी की समस्या कुछ ज्यादा है।
हिमालयी राज्यों में पानी के संकट से निपटने के लिए वाटर सेंक्चुअरी प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है। योजना के पहले चरण में 12 चयनित जिलों में जलस्रोतों को चिह्नित करने के साथ ही उन्हें पुनर्जीवित करने, जल की गुणवत्ता की जांच की जा रही है। परियोजना से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट 15 अक्तूबर तक केेंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को सौंप दी जाएगी।
-डॉ. किरीट कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं नोडल अधिकारी एनएमएचएस