इमारतों को हल्के भूकंप का झटका बार-बार चेता रहा
कहा गया कि फ्रंटलाइन एरिया के अलावा निकटवर्ती क्षेत्रों में अधिकतम तीन मंजिल के मकान बन सकेंगे। इसके बाद भी इस नियम का पालन नहीं कराया जा रहा है। नक्शे भी पास हो रहे हैं। एमडीडीए ने वर्ष 2015 में बिल्डिंग बायलॉज में प्रावधान किया था कि 30 डिग्री व इससे अधिक ढाल वाले क्षेत्रों में भवन निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह नियम भी कागजों में ही रह गया। बिधौली, मसूरी रोड समेत मालीदेवता क्षेत्र व आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों में बहुमंजिला निर्माण किया गया है। इन इमारतों को हल्के भूकंप का झटका बार-बार चेता रहा है।
भूकंप रेखा क्या है
पृथ्वी की सतह में नीचे एक लंबी दरार है। इसे फॉल्ट लाइन कहते हैं। इसमें जब भी हलचल हाेती है तो पृथ्वी के नीचे प्लेटें टकराती हैं। घर्षण होने से उत्पन्न ऊर्जा बाहर निकलती है। इससे भूकंप आता है।
दून में आया भूकंप काफी हल्का था। इसका केंद्र डोईवाला के आसपास था। इससे किसी प्रकार के नुकसान की कोई सूचना नहीं है। लेकिन ऐसे भूकंप हमें भविष्य के खतरों के लिए सतर्क करते हैं। इनसे सबक लेकर हमें भविष्य की अपनी तैयारियों को पुख्ता करना चाहिए। - नरेश कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक, वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान
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एमडीडीए भूकंप रेखा के आसपास ऊंचे भवनों के निर्माण को लेकर गंभीर है। भविष्य में फाल्ट लाइन क्षेत्र में ऊंचे भवनों के निर्माण को रोका जा सके, इसके लिए गंभीरता से काम किया जा रहा है। - बंशीधर तिवारी, उपाध्यक्ष, एमडीडीए