हिमालय की बर्फ से लकदक पर्वतमाला के बीच मौजूद गर्म पानी के झरनों को पहली बार सहेजा जाएगा। गोविन्द बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान इन झरनों के संरक्षण की कार्ययोजना को अंतिम रूप देने में जुटा है।
कार्ययोजना के तहत कई काम होने है जिसमें इनके संरक्षण की रणनीति बनाने से लेकर इनके जल से प्राप्त होने वाले तत्वों पर विस्तृत अध्ययन किया जाना शामिल है। इसके तहत नए गर्म झरनों की खोज का काम भी होना है। ‘नेशनल मिशन ऑन हिमालयन स्टडीज’ कार्यक्रम के अंतर्गत परियोजना तैयार करने का काम चल रहा है।
उल्लेखनीय है कि सौ वर्षों में इन झरनों के तापमान में न तो कोई कमी आई है और न ही इनके जल में मौजूद रसायनों की गुणवत्ता में कोई फर्क आया है। अभी तक इनके संरक्षण के लिए कोई कदम नहीं उठाया जा सका था। हिमालय क्षेत्र में अब तक 340 गर्म झरने खोजे गए हैं, जिनमें तीन सौ सक्रिय हैं।
वैज्ञानिक अध्ययनों से यह भी स्पष्ट हो चुका है कि गर्म झरनों से बिजली पैदा की जा सकती है। यहां तक कि एक गर्म झरने से तीन सौ मेगावाट तक बिजली उत्पादन किया जा सकता है। हिमालय क्षेत्र के गर्म झरनों पर शोध करने वाले वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. समीर तिवारी का कहना है कि इन झरनों के जल में बोरान, सल्फर आदि तत्व मिलते हैं। इनसे चर्म रोगों, दर्द, घाव तथा दूसरी बीमारियों का इलाज संभव है।
पहले चरण की परियोजनाएं स्वीकृत
गोविन्द बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान के निदेशक डॉ. पीपी ध्यानी ने बताया कि ‘नेशनल मिशन ऑन हिमालयन स्टडीज’ कार्यक्रम के तहत शोध के पहले चरण की परियोजनाएं स्वीकृत की जा रही हैं। इसके बाद दूसरा चरण शुरू होगा, जिसमें हिमालयी गर्म झरनों को शामिल किया गया है।
- भारतीय हिमालय क्षेत्र में 300 गर्म झरने
- उत्तराखंड के जोशीमठ, गंगनानी, बदरीनाथ, यमुनोत्री, जानकी चट्टी आदि क्षेत्र में 30 गर्म झरने
- हिमाचल प्रदेश में मणिकरण, वशिष्ठ, कसोल, टपरी, कुल्लू, नापता झाकरी आदि क्षेत्र में गर्म झरने
- लद्दाख, सिमुख, कोरना घाटी, चांग लुंग, पुल्तान पनामिक पूगा में गर्म झरने
- गर्म झरनों का स्रोत भूगर्भ में तीन किलोमीटर नीचे होता है
- सर्वाधिक तापमान 94 डिग्री सेंटीग्रेड वाले जोशीमठ, मणिकरण में