रूस-यूक्रेन के बीच पिछले दस दिनों से जारी भीषण जंग के बीच यूक्रेन की राजधानी कीव के अलावा खारकीव, लिवीव समेत तमाम शहरों से दून लौटे छात्र-छात्राओं को अब अपनी पढ़ाई की चिंता सताने लगी है। दून लौटे तमाम छात्र-छात्राओं का साफ तौर पर कहना है कि यदि केंद्र सरकार उन्हें अपने देश के ही मेडिकल कालेजों में पढ़ाई कराने की व्यवस्था कर दे तो वह किसी भी सूरत में यूक्रेन नहीं जाना चाहेंगे। इतना ही नहीं यूक्रेन से लौटे तमाम छात्रों ने पीएम मोदी से अपील की है कि वह देश के मेडिकल कॉलेजों में ही बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था करें ताकि बच्चे मेडिकल पढ़ाई कर अपना भविष्य संवार सकें।
यूक्रेन से लौटे दून निवासी छात्र सूर्यांश सिंह बिष्ट, आस्था पोखरियाल, सौम्या राणा, आदित्य और ऋषभ जैसे छात्र छात्राओं को अब अपनी पढ़ाई की चिंता सताने लगी है। इन सभी छात्र-छात्राओं का कहना है कि यूक्रेन और रूस के बीच न जाने कब तक जंग जारी रहेगी? और इस भीषण जंग में उन मेडिकल कालेजों का वजूद बचेगा या नही? जिन मेडिकल कॉलेजों में वह पढ़ाई कर रहे थे। वह सुरक्षित भी रहेंगे इसकी संभावनाएं भी कम है। ऐसे में तमाम मेडिकल छात्र छात्राओं को अपने पढ़ाई की चिंता सता रही है। इन सभी छात्रों का एक सुर में कहना है कि केंद्र सरकार और पीएम मोदी देश के ही मेडिकल कॉलेजों में उनकी पढ़ाई की व्यवस्था कर दें तो वे किसी भी सूरत में यूक्रेन जाना नहीं चाहेंगे। इतना ही नहीं छात्र-छात्राओं का यह भी कहना है कि वे देश के ही मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई करके देश में ही अपनी सेवाएं देना चाहते हैं।
रोमानिया, हंगरी, पोलैंड जैसे देशों ने अपने यहां मेडिकल पढ़ाई की पेशकश की
यूक्रेन और रूस के बीच जारी भीषण जंग में राजधानी कीव समेत तमाम शहरों में भारी तबाही हो रही है वहीं यूक्रेन की सीमा से सटे रोमानिया , पोलैंड, स्लोवाकिया, और हंगरी जैसे देशों ने अपने दूतावासों के जरिये उन तमाम भारतीय छात्र-छात्राओं से संपर्क साधना शुरू किया है जो यूक्रेन में रहकर मेडिकल पढ़ाई कर रहे थे। मेडिकल छात्र सूर्यांश सिंह बिष्ट ने बताया कि रोमानिया और हंगरी की सरकारों ने उनसे संपर्क साधा और अपने यहां के मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कराने की पेशकश की है। इतना ही नहीं इन देशों की सरकारों का यह भी कहना है कि वे अपने मेडिकल पढ़ाई पर आने वाले खर्च का जो हिस्सा दे चुके हैं वह नहीं लिया जाएगा। लेकिन छात्र छात्राओं का कहना है कि वे फिलहाल अपने देश में ही मेडिकल की पढ़ाई करने को प्राथमिकता देंगे।,
छात्र- छात्राओं को सता रहा सामान बर्बाद होने चिंता
यूक्रेन से सकुशल लौटे छात्र-छात्राओं को जहां एक ओर पढ़ाई की चिंता सता रही है, वहीं छात्रों को यह भी चिंता है कि दोनों देशों के बीच जारी जंग के बीच कहीं उनके छात्रावासों पर हमला ना हो जाए। ऐसे में उनका सारा सामान और किताबें तहस-नहस हो जाएंगी। ज्यादातर छात्रों का कहना है कि वे अपने साथ लैपटॉप के साथ कुछ सामान ही ला सके हैं जबकि बाकी सामान यूक्रेन में ही छूट गया है।
यूक्रेन में जंग के बीच अब भी फंसे हैं कई साथी
यूक्रेन से वतन वापसी करने वाले छात्र-छात्राओं सूर्यांश सिंह बिष्ट, आस्था पोखरियाल, सौम्या राणा का कहना है कि उनके कई साथी अभी भी यूक्रेन में ही फंसे हैं । ऐसे में उन्हें अपने साथियों की भी सुरक्षित वतन वापसी को लेकर चिंता सता रही है। सभी छात्र छात्राओं का कहना है कि जिस तरीके से रूस और यूक्रेन के बीच भीषण जंग जारी है उसे देखते हुए राज्य सरकार केंद्र सरकार को तेजी से राहत अभियान चलाते हुए सभी छात्र छात्राओं को सुरक्षित यूक्रेन से निकालकर अपने देश ले आए ताकि सभी छात्र छात्राओं के जीवन पर किसी भी प्रकार का संकट ना खड़ा हो।
अब भी चेहरों पर छाया है खौफ
ऑपरेशन गंगा के तहत यूक्रेन से सुरक्षित वापस लौटे सभी छात्र छात्राओं को युद्ध की विशेषता का खौफ अब भी सता रहा है। इतना ही नहीं यूक्रेन से लौटे सभी छात्र परिजनों के साथ ही रिश्तेदारों और दोस्तों को उन तमाम दुश्वारियों को साझा कर रहे हैं जो उन्होंने यूक्रेन से निकलते समय रोमानिया और पोलैंड जैसे देशों में पहुंचने तक झेली। हालांकि साथ ही सभी छात्र छात्राओं का यह भी कहना है कि यूक्रेन से निकलकर जब वे रोमानिया और पोलैंड जैसे देशों में पहुंचे तो वहां की सरकारों के साथ ही भारतीय दूतावासों ने उनकी काफी देखभाल की और किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं हुई है।