25 जनवरी 2019 को जब मैं अपनी गाड़ी साफ कर रहा था, तब मैंने अचानक गाड़ी के इंजन नंबर और चेसिस नंबर चेक किया। गाड़ी की आरसी से उसका मिलान किया तो उसका इंजन नंबर अलग था। इस पर जब मैंने नसीम से सम्पर्क करने की कोशिश की तो वह मुझे नहीं मिला।
दौलत की तहरीर के आधार पर थाना हाजा पर मुअस 13/19 धारा 420/465/468 भादवि पंजीकृत किया गया। जिसके बाद एसओजी और थाना पुलिस की टीम गठित की गई। जिसके द्वारा अभियुक्त नसीम अख्तर पुत्र मौहम्मद इस्माइल निवासी वारसीनगर जामामस्जिद के पास थाना मुरादाबाद यूपी, संजय कुमार पुत्र जसवन्त सिंह निवासी थाना नारायण गढ़ जिला अम्बाला हरियाणा हाल निवासी अमन विहार रायपुर देहरादून, उपेन्द्र सकलानी पुत्र शक्ति प्रसाद निवासी कसोली नैनबाग टिहरी हाल निवासी तपोवन एन्क्लेव रायपुर देहरादून के कुठालगेट स्थित वीआईपी मोटर गैराज को चेक किया गया
गैराज से कुल चार वाहन डस्टर संख्या यूके12ए8880, वैगनार संख्या यूए07एम0815, ऑल्टो के 10 मारुती सुजकी संख्या यूके11 – 5998, वैगनार संख्या यूए07एच 5257 बरामद किए गए।
जिन्हें चेक करने पर उनके इंजन नंबर, आरसी से अलग पाए गए। पूछताछ में आरोपियों ने आपस में मिलीभगत कर इसे अंजाम देने की बात स्वीकारी।
आरोपियों के नाम:
1- नसीम अख्तर पुत्र मौहम्मद इस्माइल निवासी वारसीनगर जामामस्जिद के पास, थाना मुरादाबाद, यूपी
2-संजय कुमार पुत्र जसवन्त सिंह निवासी थाना नारायण गढ, जिला अम्बाला हरियाणा, हाल निवासी अमन बिहार, रायपुर
3-उपेन्द्र सकलानी पुत्र शक्ति प्रसाद निवासी कसोली, नैनबाग टिहरी हाल निवासी तपोवन एन्क्लेव, रायपुर देहरादून
पूछताछ में नसीम अख्तर ने बताया गया कि वह मैकेनिक का काम करता है और गैराज का मालिक है। संजय कुमार व उपेन्द्र सकलानी उसके पार्टनर हैं। संजय नसीम को गाड़ियों के इंजन लाकर देता है और वह उन इंजनों को पुरानी गाड़ियों में फिट करके को बेच देता हैं।
ज्यादा पैसे कमाने और मकान बनाने के लिए वह यह काम कर रहा था। उसे इंजन व गाड़ी के पार्ट संजय कुमार उपलब्ध कराता था, जिसकी बाहर सेटिंग है। वह उनको सस्ते दामों में लाता था। ये इंजन व चेसिस चोरी के भी हो सकते हैं, इसकी मुझे जानकारी थी। मैं लालच में आ गया था।
संजय ने बताया कि वह गाड़ियों के इंजन व बॉडी कम दाम पर यूपी, मुजफ्फनगर से सलमान से व दिल्ली से तिलकनगर में दीदार सिंह व मायापुरी से खरीद कर लाता है। देहरादून में नसीम अख्तर को गैराज पर लाकर देता है। ये हमारी गलती है। इससे पहले हरियाणा पुलिस द्वारा संजय से इस मामले में पूछताछ की गई थी। लेकिन कोई सबूत न मिल पाने के कारण उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।
संजय ने कहा कि वह लालच में आ गया था। हम ग्राहकों को यह नहीं बताते थे कि वाहनों का फर्जी तरीके से इंजन बदला गया है।
उपेंद्र ने बताया कि उसकी आरटीओ ऑफिस में अच्छी जान पहचान है और बिना फिजिकल निरीक्षण कराए ही उन गाड़ियों के कागजात एक स्वामी से दूसरे स्वामी के नाम पर ट्रांसफर करा दिए जाते हैं।
यह सब हम लालच में करते हैं। वह नसीम अख्तर को काफी पहले से जानता है। नसीन द्वारा लाई गई गाड़ियों के कागजात वह ही बनवाता है। जिन गाड़ियों में इंजन नंबर व चेसिस नंबर अलग हैं उनका कोई फिजिकल निरीक्षण नहीं करवाया जाता था। आरटीओ में पैसे देकर उन गाड़ियों के कागजात आसानी से बन जाते थे।