तमाम प्रयास के बाद भी एचएमटी रानीबाग इकाई में बंदी की प्रक्रिया शुरू हो गई है। रानीबाग इकाई का सामान स्टोर में रखा जा रहा है।
वीआरएस का नोटिस लगने के बाद 110 कर्मियों ने वीआरएस के लिए आवेदन किया जिसमें 76 आवेदन प्रबंधन ने स्वीकार कर कर्मियों को रिलीव कर दिया है। दूसरी ओर यूनियन के पदाधिकारी वीआरएस की समयावधि एक माह बढ़ाने की मांग को लेकर एचएमटी ग्रुप के चेयरमैन से मिले।
एचएमटी वाच ग्रुप को बंद करने का फैसला प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली आर्थिक कमेटी ने लिया था। निर्णय के बाद प्रबंधन ने फैक्ट्री परिसर में नोटिस चस्पा कर 19 मार्च तक कर्मियों से आवेदन करने को कहा था। 110 एचएमटी कर्मियों ने वीआरएस के लिए आवेदन किया।
प्रबंधन ने 76 कर्मियों का आवेदन स्वीकार कर लिया है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार रानीबाग इकाई में रखा सामान भी स्टोर में जाने लगा है और उसे सील करने की तैयारी चल रही है। दूसरी एचएमटी एंप्लाइज यूनियन के महामंत्री प्रकाश मिश्रा, उपाध्यक्ष बीसी तिवारी, धीरेंद्र मोहन, जेडी भट्ट, आरएस बिष्ट बंगलूरू में चेयरमैन गिरीश कुमार से मिले और वीआरएस की समयावधि एक माह बढ़ाने की मांग की।
मिश्रा ने बताया कि चेयरमैन से कहा गया कि 30 वर्ष से कुछ कम समय नौकरी करने वालों को वीआरएस लेने पर आठ से दस लाख रुपये का नुकसान होगा। ऐसे कर्मियों के बारे में सहानुभूति पूर्वक विचार किया जाना चाहिए। चेयरमैन ने मांग पर विचार करने का आश्वासन दिया है। एचएमटी ग्रुप के चेयरमैन गिरीश कुमार मार्च दूसरे सप्ताह में एचएमटी रानीबाग आ सकते हैं।