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सालों से मतदाता बनने के लिए भटके ये लोग

Thu, 08 May 2014 03:55 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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लोकतंत्र के महापर्व में देहरादून में कई मतदाता ऐसे भी मिले, जो वोट देकर संसद को बेहतर प्रत्याशी तो देना चाहते हैं।
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सरकारी लापरवाही से वोटिंग से वंचित
लेकिन सरकारी लापरवाही ने उन्हें उनके अधिकार से वंचित किया हुआ है। दूसरी ओर, कई वोटर ऐसे भी रहे, जिन्होंने विधानसभा चुनाव में वोट दिया था लेकिन इस बार उनका नाम नहीं मिला।

लाल गेट (गढ़ी) निवासी हर्षपाल सिंह और रमेश सिंह रावत बुधवार सुबह ही गढ़ी बाजार स्थित पोलिंग बूथ पर मतदाता सूची में घंटों नाम तलाशते रहे।

कहा वोट देना उनके लिए सिर्फ सपना बनकर रह गया है। तीस साल से इसी क्षेत्र में रह रहे हैं, हर बार फार्म भरते हैं, लेकिन आज तक न वोटर आईडी मिली न लिस्ट में नाम आया।
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इस बार सूची में नाम नहीं
उन्होंने सवाल किया कि आखिर बीएलओ, प्रशासनिक अधिकारी करते क्या हैं? वहीं, कई लोग ऐसे भी थे जिन्होंने वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में वोट दिया था, लेकिन इस बार सूची में उनका नाम नहीं था।

गुरु रोड निवासी पूजा मित्तल ने बताया कि घंटों नाम तलाशने के बाद घर लौटना पड़ा। हाथीबड़कला निवासी मदन लाल की भी यही शिकायत थी।

इसके अलावा कुछ लोग ऐसे भी मिले, जिनके मतदान बूथ कहीं और थे, जबकि वे रहते दूसरी जगह हैं। इससे लोग दिनभर अपना बूथ तलाशते रहे।

बैंक कॉलोनी निवासी रमन जोशी का नाम गायब था, जबकि उनकी पत्नी का नाम मिल गया। लाडपुर के ईश्वर विहार निवासी प्रदीप सिंह रावत का नाम सूची में नहीं था, लेकिन उनके माता-पिता का नाम था।

गंगोत्री विहार निवासी महेश चंद्र भी नाम न होने से वोट नहीं दे सके। शिवलोक कॉलोनी निवासी नमित भी मायूस लौटे। बताया कि घर के आठ सदस्यों में से सिर्फ उनका नाम लिस्ट से गायब था।

सरकारी लापरवाही से बुजुर्ग निराश
सुबह 08:30 बजे राजकीय बालिका इंटर कालेज अजबपुर कलां के मुख्य गेट पर एक जवान के बगल में सफेद धोती-कुर्ता पहने एक बुजुर्ग परेशान से बैठे थे।

पूछा तो नाम मुरारी लाल गुप्ता और उम्र 84 वर्ष बताई। गुप्ता ने कहा कि वह 15 साल से साकेत कॉलोनी में रह रहे हैं। पिछले चुनाव में इसी बूथ पर वोट दिया था, लेकिन इस बार नाम गायब है।
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बताया कि हाल ही में पैर का आपेरशन हुआ है। इसके बावजूद वह वोट देने आए, लेकिन नाम न होने से बाहर बैठे हैं। गुप्ता के पुत्र सूचियों में माथापच्ची करते रहे, लेकिन एक घंटे तक नाम तलाशने के बाद निराश लौटना पड़ा।
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