भले ही 'कृष 3' में 'काल' (विवेक ओबेरॉय) विलन के रूप में उभरा हो, लेकिन अपनी रियल लाइफ में विवेक ओबेरॉय हिमालय को बचाने में जुटे हैं।
विवेक ने दिए सुझाव
मंगलवार को स्वर्गाश्रम स्थित परमार्थ निकेतन में आयोजित इंटरनेशनल ग्रीन विजन कांफ्रेंस में फिल्म अभिनेता विवेक ओबेरॉय ने कहा कि इकोलॉजी और इकोटूरिज्म से गांवों को जोड़कर गंगा परिवार सेवक (जीपीएस) और कार्बन क्रिएट सेंटर (सीसीसी) के तहत कार्य किया जाएगा।
बताया कि जीपीएस में इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों और रोबोट के जरिए गंगा और पर्यावरण से हजारों टन कचरा आसानी से निकाला जा सकता है। इससे ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।
इसी प्रकार सीसीसी के तहत जो लोग वन तैयार कर रहे हैं, उन्हें कार्बन क्रेडिट आर्थिक सहयोग के रूप में दिया जाएगा। अभिनेता ने इसके लिए प्रशासन से मदद की अपील की।
मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने इस दौरान हिमालय और पर्यावरण संरक्षण के लिए हिमालय विकास प्राधिकरण बनाने की पुरजोर वकालत की है।
हिमालयी राज्यों को एक नीति के तहत जोड़ना होगा
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को इसके लिए हिमालयी राज्यों को एक नीति के तहत जोड़ना होगा। उन्होंने प्रदेश में छह प्रतिशत वन भूमि की बढ़ोत्तरी को पर्यावरण के लिए सुखद बताया। कहा कि उत्तराखंड के विकास लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और यातायात पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
कांफ्रेंस में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए सीएम ने राज्य के पर्यावरण संवर्धन के लिए वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, गंगा और संस्कृति प्रेमियों द्वारा किए जा रहे एकजुट प्रयासों को सराहा।
कहा कि गंगा ही नहीं बल्कि सभी नदियां पूजनीय हैं। इनके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। बताया कि आपदा से प्रदेश में वृहद स्तर पर त्रासदी हुई है। इससे राज्य की अधिकांश सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं, जिसके कारण यातायात, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है।
औषधियों के संवर्धन और उत्पादन पर जोर
सरकार इन्हें दुरुस्त कर व्यवस्थाएं बनाने में जुटी है। आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद मुनि ने हर-हर गंगे के साथ हर्बल गंगे को जीवन जीने का मूलमंत्र बताया।
पूर्व सीएम डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने आर्थिक स्वावलंबन के लिए जड़ी-बूटियों और पर्वतीय औषधियों के संवर्धन और उत्पादन पर जोर दिया।
कार्यक्रम में जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि, प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव आरएस टोलिया, पर्यावरणविद् जगत सिंह जंगली, डॉ. विभवकांत उपाध्याय, डॉ. आकाश सिन्हा ने भी विचार व्यक्त किए।