देश में ग्रीन स्कूल बनाकर शिक्षा को पर्यावरण से जोड़ने का उत्तराखंड के बेटे विरेंद्र रावत का आइडिया केंद्र को भी भा गया।
केंद्र ने यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन) की ओर से पहली बार मिलने जा रहे ‘यूनेस्को-जापान प्राइज ऑन एजुकेशन फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ के लिए विरेंद्र का नाम भेज दिया है। यह मुकाम हासिल करने वाले विरेंद्र पहले और अकेले भारतीय बन गए हैं।
संयुक्त राष्ट्र संघ की पर्यावरण संबंधी संस्था यूनेस्को ने पहली बार दिए जाने वाले पर्यावरण शैक्षिक पुरस्कार के लिए प्रविष्टियां मांगी थी। केंद्र सरकार के पास देशभर से 1000 से ज्यादा पर्यावरणविदें के आवेदन आए। इसमें से विरेंद्र का चयन कर उनका नाम यूनेस्को को भेज दिया गया।
दो दिन पहले ही विरेंद्र को इसकी सूचना केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से फोन पर दी गई। विरेंद्र ने खुशी जताते हुए कहा कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि यह अवार्ड उन्हें ही मिलेगा।
पुरस्कार मिलने की सूरत में उन्हें 50 हजार डॉलर की राशि के साथ ही प्रशस्ति पत्र भी यूनेस्को की ओर से दिया जाएगा। इसकी घोषणा अगस्त में और पुरस्कार नवंबर में होने वाले समारोह में दिया जाएगा।
ग्रीन स्कूल में बच्चे नहीं होते बीमार
विरेंद्र रावत ने फोन पर बताया कि ग्रीन स्कूल एक सोच है। इसमें छात्रों को जीने के लिए आधारभूत तत्व जल, गगन, वायु, अग्नि और पृथ्वी उपलब्ध कराये जाते हैं। पांचों तत्वों के बारे में गहनता से छात्रों को बताया जाता है।
ग्रीन स्कूल के भीतर बच्चे के लिए कम से कम एक पेड़ लगाया जाता है। इन स्कूलों में बच्चों के खेल भी पर्यावरण संबंधित ही होते हैं। बच्चों को व्यर्थ की चीजों को रिसाइकिल कर उन्हें प्रयोग में लाना सिखाया जाता है। विरेंद्र ने बताया कि यहां पढ़ने वाला छात्र कभी बीमार नहीं पड़ता।