देहरादून में आयोजित हो रहे विरासत की तीसरी रात वारसी और हुसैन बंधुओं के नाम रही।
धुंध से घिरी रात पर गजलों की चादर
रिमझिम फुहारों के बीच सर्द, सुस्त माहौल को वारसी बंधुओं की कव्वालियों ने जगाकर गुनगुना किया तो हुसैन बंधुओं ने हल्की धुंध में घिरी रात पर गजलों की चादर तान दी।
वारसी बंधुओं का शुरू किया दौर देर रात हुसैन बंधुओं के माइक छोड़ने पर जब थमा, तब ही लोगों को अहसास हुआ कि मौसम बेहद ठंडा है। इससे पहले पूरा पंडाल तालियों, दादों से गूंजता रहा।
विरासत की तीसरी रात की शुरुआत हुई रामपुर से आए प्रख्यात कव्वाल बंधु नजीर अहमद खान वारसी और नसीर अहमद खान वारसी की प्रस्तुतियों से। वारसी बंधुओं ने अमीर खुसरो के कलाम छाप तिलक सब छीनी... से शुरुआत की तो सारा माहौल झूम उठा।
मेले में स्टालों पर जुटे और काफी की चुस्कियां लेकर ठंड भगाते लोग दोनों भाइयों की पहली ही तान पर पंडाल की ओर जुटने लगे। सुर अभी उठा ही था कि पूरा पंडाल खचाखच भर गया। इसके बाद तो एक के बाद एक कव्वालियों पर दर्शक झूमते रहे। वारसी बंधुओं ने पिया हाजी अली... से प्रस्तुतियों का समापन किया।
इसके बाद मंच संभाला उस्ताद अहमद हुसैन और उस्ताद मोहम्मद हुसैन ने। गणेश वंदना से शुरुआत करने के बाद हुसैन बंधुओं ने मुसाफिर हैं हम तो चले जा रहे हैं..., हर खुशी है चांद सितारों की चमक..., ये जो हममें तुममें करार था... जैसी गजलें पेश कीं तो पंडाल वाह-वाह से गूंज उठा।
बारिश ने किया इस्तकबाल
वारसी बंधुओं के मंच पर आने से पहले रिमझिम फुहारें बीच-बीच में गिर रही थीं। लेकिन दोनों भाइयों के कव्वाली पेश करते ही झड़ी लग गई। बाद में हुसैन बंधु मंच पर पहुंचे तो भी बादल बरसने लगे। लगा कि आसमान हुसैन और वारसी बंधुओं का अपने अंदाज में कर रहा है।
बिदेसिया में दिखा बिछोह का दर्द
वारसी और हुसैन बंधुओं से पहले बिहार के लोककलाकारों ने नाटक बिदेसिया का मंचन किया। संजय उपाध्याय के नेतृत्व में कलाकारों ने भिखारी ठाकुर के लिखे नाटक बिदेसिया (विदेशिया) में नायक-नायिका के बिछोह का दर्द उभारा। कहानी में नायक नौकरी के लिए विदेश चला जाता है।
उसके बाद घर में नायिका (पत्नी) किस तरह परेशानियां उठाती है, पति को याद करती है के दृश्यों पर कई दर्शक भावुक हो उठे। विदेश में रोजी की तलाश में भटकते नायक की हालत ने कबूतरबाजों का शिकार हो जाने वाले बेरोजगार युवाओं का दर्द उभारा।
आज के कार्यक्रम
- महाराष्ट्र के कलाकारों का लावणी नृत्य: शाम 5 बजे
- उत्तरकाशी के जयप्रकाश और साथियों का कार्यक्रम: शाम 6 बजे
- नूरान बहनों का सूफी गायन:- शाम 8 बजे