हरिद्वार लोकसभा सीट पर भाजपा की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री निशंक के मैदान में उतरने से कांग्रेस के समीकरण गड़बड़ा गए हैं।
पढ़ें, कांग्रेस में एक और 'तूफान' ने दी दस्तक
अभी तक मुख्यमंत्री हरीश रावत अपनी ‘विरासत’ को घर में ही रखने का ताना-बाना बुने हुए थे। लेकिन निशंक के सामने से अब भारी-भरकम उम्मीदवार की तलाश करना कांग्रेस के लिए चुनौती बन गया है।
पढ़ें, वोटों के लिए 'नरकंकाल' की नुमाइश
खुद मुख्यमंत्री भी यह बात स्वीकार कर चुके हैं।
कांग्रेस ने अभी नहीं खोले पत्ते
कांग्रेस के पत्ते खोलने के बाद ही चुनावी तस्वीर पूरी तरफ साफ होने की उम्मीद है। हरिद्वार लोकसभा सीट पर कांग्रेस की ओर से कौन चुनाव मैदान में उतरेगा, पार्टी ने अभी पत्ते नहीं खोले हैं।
पढ़ें, शिक्षिका के घर में घुसकर प्रिंसिपल ने की गलत हरकत
हालांकि मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस सीट पर बेटी अनुपमा रावत या बेटे वीरेंद्र रावत को चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रखी थी।
पढ़ें, 20 अप्रैल तक केदारनाथ रूट हो जाएगा तैयार!
पिता की विरासत संभालने के लिए अनुपमा और वीरेंद्र ने जनता के बीच अपनी उपस्थिति बढ़ा दी थी। लेकिन भाजपा द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री निशंक को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
जोर-शोर से विकल्प की तलाश
प्रदेश के कांग्रेस दिग्गजों का मानना है कि राजनैतिक कैरियर और पकड़ के लिहाज से निशंक भारी पड़ सकते है।
पढ़ें, कांग्रेस में एक और 'तूफान' ने दी दस्तक
ऐसे में उनके सामने दमदार प्रत्याशी लाया जाए, जो उन्हें टक्कर दे चुका है। यही वजह है कि जोर-शोर से विकल्प की तलाश हो रही है।
पढ़ें, वोटों के लिए 'नरकंकाल' की नुमाइश
खुद मुख्यमंत्री हरीश रावत भी यह कह चुके हैं कि पहले दूसरे विकल्पों पर मंथन करने के बाद ही उनके बेटी अथवा बेटे के नाम पर विचार होगा।
पढ़ें, शिक्षिका के घर में घुसकर प्रिंसिपल ने की गलत हरकत
वह जल्दबाजी दिखाकर कोई राजनैतिक रिस्क लेने के मूड में भी नहीं दिख रहे हैं। माना जा रहा है कि चुनाव मुख्यमंत्री का कोई परिजन लड़े या कोई दूसरा, लेकिन यह सीट रावत के लिए प्रतिष्ठा का सवाल रहेगी।
भाजपा लगा चुकी हैट्रिक
हरिद्वार लोकसभा सीट पर भाजपा हैट्रिक लगा चुकी है। भाजपा उम्मीदवार के रूप में हरपाल साथी यहां से तीन बार निर्वाचित होकर संसद तक पहुंचे।
सपा भी एक बार दर्ज करा चुकी उपस्थिति
हरिद्वार लोकसभा सीट पर सपा भी एक बार विजय पताका फहरा चुकी है। सपा के राजेंद्र बाडी यहां से जीत हासिल कर चुके हैं।
अभी कांग्रेस का कब्जा
इस सीट पर अभी कांग्रेस का कब्जा है। 2009 के चुनाव में हरीश रावत ने बसपा को पराजित कर पहली बार कांग्रेस का परचम लहराया था।