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Vinay Tyagi Attack: चोरी में जेल जाने से लेकर अभिरक्षा में हमले तक...क्या पटकथा का लेखक ही है विलेन?

Sat, 27 Dec 2025 03:41 PM IST
अलका त्यागी रुद्रेश कुमार, अमर उजाला, देहरादून

सार

 Vinay Tyagi Death : विनय त्यागी सितंबर में नेहरू कॉलोनी में अपने डॉक्टर दोस्त के घर पर था। इस बीच 15 सितंबर को उस डॉक्टर दोस्त ने ही विनय त्यागी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया कि उसने उनकी कार से बैग चोरी किया है।
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- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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हत्या, डकैती, लूट जैसे 38 मुकदमों में आरोपी हिस्ट्रीशीटर विनय त्यागी का पहले साधारण बैग चोरी में जेल जाना फिर अब एकाएक पुलिस अभिरक्षा में उस हमला। हमले के वक्त पुलिसकर्मियों का जवाबी कार्रवाई न करना। इसके बाद उनके पकड़े जाने पर पुलिस के साधारण से बयान। हमलावरों से बरामद हथियार। ये सब किसी सस्पेंस क्राइम थ्रिलर सीरीज की स्कि्रप्ट जैसी लग रही है। अब इस स्कि्रप्ट में शुरूआत से ही विनय त्यागी और पुलिस दोनों ही मुख्य भूमिका में है। सवाल यह है कि विलेन कौन है? क्या पटकथा का लेखक ही विलेन है? पुलिस इसे ढूंढेगी या उसने खुद को इतना शक्तिशाली बनाया कि कभी सामने ही नहीं आएगा।

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दरअसल, विनय त्यागी सितंबर में नेहरू कॉलोनी में अपने डॉक्टर दोस्त के घर पर था। इस बीच 15 सितंबर को उस डॉक्टर दोस्त ने ही विनय त्यागी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया कि उसने उनकी कार से बैग चोरी किया है। पुलिस ने तत्काल मामले में मुकदमा दर्ज किया और 29 सितंबर को विनय त्यागी को मय बैग गिरफ्तार कर लिया। सारी रकम और सोने-चांदी के सिक्के इसी बैग में मौजूद थे। इस कार्रवाई पर भी सवाल उठा कि आखिर कैसे 38 संगीन अपराधों के मुकदमों में आरोपी एक सामान्य चोरी कर सकता है। अगर चोरी कर भी ली तो डॉक्टर भी साफ छवि वाला नहीं है। उसकी भूमिका भी हमेशा से सवालों के घेरे में रही। मुकदमे डॉक्टर के खिलाफ भी कई दर्ज हैं।

ये था इस कहानी का सितंबर का एपिसोड जिस पर कुछेक सवाल लोगों के मन में कौंधे और फिर मामला ठंडा हो गया। बीते कुछ दिनों से विनय त्यागी लगातार चर्चाओं में बना हुआ था। चर्चा करीब दो महीने के बाद फिर से इस तरह की चर्चाएं होने लगीं कि विनय त्यागी एकाएक देहरादून आकर कैसे बसा। एक तर्क इसके पीछे यह भी था कि उसे यूपी एसटीएफ तलाश कर रही थी। लिहाजा उसने खुद को इस चोरी के मुकदमे में फंसाया जिसमें उसने सहारा डॉक्टर का लिया। चर्चाएं चल ही रहीं थी कि पिछले दिनों उस पर लक्सर में हमला हो गया। यहां से फिर कई सवालों और चर्चाओं ने जन्म ले लिया।
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ठोस बात कोई नहीं, एनकाउंटर की साहसिक कहानियां कटघरे में
हमला करने वाले दोनों आरोपियों को हरिद्वार पुलिस ने अगले दिन गिरफ्तार करने का दावा किया। उत्तराखंड में इस तरह के गिने चुने मामले ही हैं। घटना बेहद दुस्साहसिक और बीते दो वर्षों से चले आ रहे एनकाउंटरों में पुलिस के साहस की कहानियों को कटघरे में खड़ा कर गई। हमलावर पकड़े गए बताया गया कि इनका विनय त्यागी से पैसों का लेनदेन का विवाद चल रहा था। बस इतनी सी बात प्रेसनोट में लिखी लेकिन उनके इस विवाद की कोई ठोस कहानी पुलिस नहीं बता पाई। बताया गया कि ये दोनों हमलावर विनय त्यागी के साथ कई अपराधों में शामिल रहे हैं।

क्या तमंचों से चंद सेकेंड में चला दी तीन गोलियां
हमलावरों के पास से दो तमंचे बरामद हुए। तमंचे में एक ही गोली भरी जा सकती है। हमलावर मोटरसाइकिल से आए थे। इनमें से पीछे बैठे हमलावर ने गोली चलाई। जाहिर है अगर दो तमंचे दोनों हाथों में भी होंगे तो दो गोलियां चला दीं। इसके बाद एक तमंचा तो लोड किया ही होगा। इसमें पांच-सात सेकेंड का समय तो लगा ही होगा फिर भी पुलिसकर्मियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। लोड भी नहीं हुआ तो तीन तमंचे हो सकते हैं कि एक लोडेड तमंचा जेब से निकाला और फिर गोली चलाई। ऐसे में तीसरा तमंचा न तो घटनास्थल पर मिला और न ही इन दोनों के पास से।

सितंबर से लेकर अब तक के पूरे प्रकरण में दोनों जिलों से रिपोर्ट मांगी गई है। गोली चलाने के मामले की जांच जारी है। रिपोर्ट मिलने के बाद जांच में उसे भी शामिल किया जाएगा। जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
- राजीव स्वरूप, आईजी गढ़वाल
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