मन में कुछ करने जज्बा हो तो हर मुश्किल आसान हो जाती है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया ठेली, सरतोली और भतंग्याला के ग्रामीणों ने।
उनके गांव तक जाने का रास्ता बीच में खस्ताहाल होने के कारण गांव में वाहन भी नहीं पहुंच पा रहे थे। ऐसे में ग्रामीणों ने वाहन (जीप) के पार्ट्स अलग-अलग कर उसे अपने गांव तक पहुंचाया। अब ग्रामीणों की पांच किमी की पैदल दूरी सिर्फ डेढ़ किमी रह गई है।
अभी तक नहीं बन पाई सड़क
वर्ष 1996 में 20 किमी चमोली-लासी-सरतोली मोटर मार्ग का निर्माण कार्य शुरू हुआ। सड़क निर्माण कार्य तो पूर्ण हो गया, लेकिन विभागीय लापरवाही के कारण सड़क वाहनों के चलने लायक नहीं बन पाई।
पढ़ें, राहुल बोले, लाएंगे स्वास्थ्य का अधिकार
अनरगड़ तोक में डेढ़ किमी हिस्सा आपदा के कारण क्षतिग्रस्त पड़ा हुआ है, जिसे लोनिवि अभी तक ठीक नहीं कर पाया। इससे क्षुब्ध ग्रामीणों ने अपने गांवों को वाहन सुविधा से जोड़ने का अनोखा तरीका ईजाद किया।
सिस्टम सोया रहा लगन जीत गई
बुधवार को ठेली, सरतोली और भतंग्याला के ग्रामीणों ने जीप के अलग-अलग हिस्से कर अनरगड़ तोक के डेढ़ किमी खस्ताहाल रास्ते से दूसरे छोर तक जीप पहुंचा दी।
पढ़ें, चारधाम यात्रा पर मंडरा रही आपदा की ‘प्रेतछाया’
तीनों गांवों के 80 ग्रामीणों ने मिलकर मंगलवार से काम शुरू किया और पैदल ही बुधवार को गांवों तक वाहन पहुंचाया।
आसान हुआ रास्ता
अब ग्रामीणों को अपने गांवों से चमोली बाजार तक आने के लिए पांच किमी की खड़ी चढ़ाई के बजाय सिर्फ डेढ़ किमी की पैदल दूरी नापनी पडे़गी।
स्थानीय ग्रामीण वीरेंद्र, अरविंद, सोहन, अंशु और मुकेश का कहना है कि मोटर मार्ग की सुविधा न होने से गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसे जिसे देखते हुए तीनों गांवों के युवक मंगल दल ने यह निर्णय लिया और गांव तक वाहन पहुंचा।