उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के अठाली गांव में रविवार को बही पुलिया को ग्रामीणों ने दस घंटों में ही तैयार कर दिया।
गांव वालों को ऐसा इसलिए करना पड़ा क्योंकि सोमवार को गांव में शादी होनी थी। इसे देखते हुए ग्रामीणों ने हौसला दिखाया और पुलिया बनाने में जुट गए। पास में ही स्थायी पुल निर्माण में लगे ठेकेदारों ने भी जेसीबी मशीन देकर ग्रामीणों की मदद की।
रविवार को मेनरीभाली स्टेज टू के बैराज जलाशय से छोड़े गए पानी के तेज बहाव से भागीरथी पर बनी अठाली गांव को जोड़ने वाली लकड़ी की पुलिया बह गई थी। इससे अठाली गांव अलग-थलग पड़ गया था। सोमवार को गांव में मंगल सिंह के पुत्र अजय की शादी थी।
पूरी रात पुल बनाया
बारात भी इसी पुलिया से जानी थी, लेकिन पुलिया बह जाने से ग्रामीण चिंतित थे। ऐसे में ग्रामीण अपने जोश और जज्बे का परिचय देते हुए रविवार शाम पांच बजे ही पुलिया बनाने में जुट गए।
ग्रामीणों ने रात को ही एक किमी दूर तक बही पुल की लकड़ी को ढोया, लेकिन रात में लाइट की व्यवस्था न होने के कारण ग्रामीण पुल लगाने के लिए नदी में नहीं उतर पाए और दस बजे काम रोक दिया।
धूमधाम से गई बारातसोमवार सुबह छह बजे ग्रामीण फिर से पुलिया बनाने में जुटे और सुबह ग्यारह बजे तक लकड़ी की पुलिया तैयार कर दी। इससे ग्रामीण तो पुलिया से आवागमन कर ही रहे हैं अजय की बारात भी धूमधाम से इसी पुलिया से गई।
पुलिया बनाने में ग्रामीण विजेंद्र सिंह राणा, सतपाल सिंह, कल्याण सिंह, गजेंद्र सिंह, संदीप पंवार, पूरण सिंह, चिरंजी प्रसाद, निहाल सिंह, प्रीतम सिंह, महावीर, श्याम सिंह, बलवीर, कुलदीप पंवार, भगवान सिंह समेत कई ग्रामीण शामिल रहे।
हम पिछले दो सालों से लकड़ी की पुलिया से आवागमन कर रहे हैं, जो कई बार बह चुकी है। प्रशासन को स्थायी पुल निर्माण में तेजी लानी चाहिए। हम कब तक वैकल्पिक पुल तैयार करते रहेंगे। - जयेंद्र पंवार, निवासी अठाली गांव।