उत्तराखंड का एक हिस्सा ऐसा भी है जहां सरकार को लोंगो की समस्याओं की कोई चिंता नहीं है। पूरे इलाके में लोगों के सामने जीने का संकट खड़ा हो गया है।
उत्तराखंड की थराली तहसील के देवाल और थराली विकास खंडों में दो माह से अधिक समय से रसोई गैस की आपूर्ति नहीं हुई है, जिससे 2700 से अधिक उपभोक्ताओं के सामने चूल्हा जलाने का संकट पैदा हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि भारत गैस की सप्लाई जिन गोदामों से होती है, वहां के मार्ग बंद हैं। विकास खंडों को कुमाऊं से जोड़ने वाली सड़क की स्थिति अन्य सड़कों से बेहतर है। ऐसे में गैस की सप्लाई कुमाऊं से ही की जानी चाहिए।
सड़क टूटने से नहीं मिली गैस
तहसील के नारायणबगड़, थराली और देवाल में इंडेन रसोई गैस के अलावा भारत रसोई गैस की सप्लाई होती है। पिछली 16/17 जून से नारायणबगड़ से थराली तक कई जगह मोटर मार्ग बंद है।
भारत रसोई गैस का गोदाम नारायणबगड़ होने से थराली और देवाल सहित ग्वालदम में भारत रसोई गैस की आपूर्ति ठप है। हालांकि थराली में इंडेन रसोई गैस की आपूर्ति सुचारु है, लेकिन देवाल और थराली में भारत रसोई गैस के उपभोक्ताओं को रसोई गैस नहीं मिल रही है। यहां भारत के 2700 से अधिक उपभोक्ता हैं।
मिट्टी का तेल हुआ मंहगा
केदारबगड़ कस्बे के केदार दत्त के अनुसार उनके पास भारत रसोई गैस का कनेक्शन है, लेकिन गत 15 जून से उन्हें सिलेंडर नहीं मिल पाया है। ऐसे में उन्हें 25 रुपये प्रति लीटर मिट्टी तेल खरीदकर चूल्हा जलाना पड़ रहा है।
वहीं ग्वालदम की जशमा देवी का चार सदस्यों का परिवार है, लेकिन पिछले दो माह से सिलेंडर नहीं मिलने पर उन्हें मजबूरन जंगल से लकड़ियां बीनकर काम चलाना पड़ रहा है।
सुनेगा कौन
लोगों का कहना है कि इंडेन गैस की भांति भारत गैस की आपूर्ति भी कुमाऊं से की जाती, तो उपभोक्ताओं को रसोई गैस संकट से नहीं जूझना पड़ता।
वहीं भारत गैस ऐजेंसी के वितरक धर्मेंद्र चौधरी ने बताया कि सड़क बंद होने के चलते हल्द्वानी से सप्लाई करने की मांग उच्चाधिकारियों और कंपनी से की गई थी, लेकिन मामले में कोई निर्देश नहीं मिल पाए हैं।