फाल्गुन माह की होली के रंगों में तो सभी सराबोर होते है, लेकिन उपला टकनौर क्षेत्र में आयोजित मक्खन और मट्ठे के साथ खेली जाने वाली होली अंडुड़ी (बटर फेस्टिवल) की अपनी विशेष पहचान है। मान्यता के अनुसार बरसात के बाद बुग्यालों में उगी पौष्टिक एवं मखमली घास को चरने से ही ग्रामीणों के पशु अच्छा दूध देते हैं, जिसकी खुशी में वे दूध, मक्खन की होली खेलकर मनाते हैं। पूर्व में यह उत्सव केवल ग्रामीणों तक ही सीमित था, लेकिन बदलते वक्त के साथ ये बटर फेस्टिवल में तब्दील हो गया।
दयारा बुग्याल में दयारा पर्यटन उत्सव समिति, बालाजी सेवा संस्थान एवं उत्तराखंड सिडकुल पर्यटन के सहयोग से अंडुड़ी उत्सव का आयोजन किया गया। अंडुडी उत्सव के एक दिन पूर्व होल्यार रैथल गांव में एकत्रित हुए। बृहस्पतिवार को सात किमी की पैदल दूरी तय कर ग्रामीण गोई, चिलपड़ा पड़ाव होते हुए दयारा पहुंचे, जहां अंडुड़ी उत्सव का शुभारंभ गंगोत्री विधायक गोपाल रावत, ब्लॉक प्रमुख चंदन पंवार, प्रभारी पर्यटन सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने किया।
इसके बाद राधा-कृष्ण के साथ होल्यारों ने मक्खन व मट्ठे की होली खेलते हुए बुग्याल का चक्कर लगाया व मट्ठे से भरी मटकी फोड़ी। अंडुड़ी उत्सव के दौरान ग्रामीण महिलाओं एवं पुरुषों द्वारा ढोल दमाऊं की थाप पर रासौं व लोकनृत्य, लोकगीतों की प्रस्तुति दी गई।
लोक गायक राम सिंह राणा एवं उनके साथियों ने भी प्रस्तुति दी। इस मौके पर विधायक व प्रमुख ने दयारा में सुलभ शौचालय के लिए एक लाख देने की घोषण की। वहीं प्रभारी पर्यटन सचिव ने दयारा को विकसित करने की बात कही। समिति के अध्यक्ष मनोज राणा ने बताया कि पशुपालन पर टिकी आजीविका के चलते ग्रामीण सुख समृद्धि की कामना करते हुए वर्षों से दयारा बुग्याल में मठ्ठा व मक्खन की होली खेलते हैं।