सीमांत क्षेत्र जाराजिबली की एक गर्भवती महिला को प्रसव कराने के लिए 10 किलोमीटर दूरी तक डोली पर बैठाकर लाना पड़ा। जाराजिबली से बंगापानी तक महिला को डोली पर बैठाकर लाने में लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी, क्योंकि जाराजिबली से बंगापानी जाने वाली सड़क जून से बंद पड़ी है।
इस सड़क पर इतना ज्यादा मलबा पटा है कि उसमें पैदल चल पाना भी संभव नहीं है। बंगापानी से महिला को एक वाहन पर बैठाकर बरम तक लाया गया। बरम में मोटर पुल टूटा होने के कारण लोगों ने किसी तरह महिला को उफनता नाला पार कराया और वहां से 96 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल लेकर गए हैं।
जारा गांव के वीरेंद्र सिंह की पत्नी आशा देवी गर्भवती हैं। उनको मंगलवार रात अचानक दर्द शुरू हो गया। बंगापानी के युवकों ने महिला को डोली पर बैठाकर अस्पताल तक ले जाने का फैसला लिया। इसमें नब्बू बिष्ट, विक्की बिष्ट, रमेश बिष्ट, भाष्कर बिष्ट, उम्मेद बिष्ट, गंगा सिंह बिष्ट आदि ने कठिन रास्ते से आशा देवी को तीन घंटे में बंगापानी स्टेशन पर पहुंचाया।
जाराजिबली में एक एएनएम सेंटर तो खुला है, लेकिन उसमें कभी कोई कर्मचारी नहीं आता। लोगों में सड़क और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को लेकर भारी गुस्सा है। उन्होंने एएनएम सेंटर को खोलने और बंद पड़ी सड़क से मलबा हटाने की मांग की।