गांव की साफ-सुथरी आबोहवा, बेहतर खान-पान और थका देने वाली दिनचर्या छोड़कर शहरों में बसने वाली महिलाओं का दिल खतरे में है।
जी हां, अत्यधिक तनाव, प्रदूषण, अव्यवस्थित खान-पान और आराम परस्त जिंदगी उन्हें हृदय से जुड़ी बीमारियां दे रही है। विशेषकर मानसिक तनाव, रक्तचाप और हृदय रोग के मामलों में खासी बढ़ोतरी हो रही है।
11 शहरों के छह हजार लोगों पर किए गए इंडियन हार्ट वाच अध्ययन में भी इसकी पुष्टि हुई है। अध्ययन के अनुसार, हृदय रोग पीड़ितों में शारीरिक रूप से निष्क्रिय 83 फीसदी महिलाएं शामिल हैं।
पहाड़ के ज्यादातर गांवों में महिलाओं की दिनचर्या व्यस्तता भरी होती है। उनकी जीवन शैली व्यवस्थित और अनुशासित होती है। खेती, पशुओं के चारे, ईंधन समेत जरूरतों के लिए वह कई-कई किलोमीटर का सफर तय करती हैं।
घर-परिवार के कामकाज के चलते होने वाली उनकी यह भागदौड़ बेशक थका देने वाली हो, लेकिन उनके स्वास्थ्य के लिए खासी फायदेमंद होती है। हृदय रोग विशेषज्ञों के मुताबिक, यह सब छोड़कर शहरों में बसने वाली महिलाओं में तमाम तरह की बीमारियां घर कर रही हैं।
शहर की अव्यवस्थित जीवन शैली है खतरनाक
शहरों की आराम परस्त और अव्यवस्थित जीवन शैली उनको मोटापे और हृदय रोगों की सौगात दे रही है। दरअसल, मोटापा, व्यायाम व शारीरिक श्रम की कमी, अव्यवस्थित खान-पान, जंक फूड़ की अधिकता और धूम्रपान को हृदय रोगों का मुख्य कारण माना जाता है।
शहरी महिलाओं की जीवनशैली में यह सभी कारण शामिल हैं। हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी महिलाओं में हृदय रोगों का खतरा 30 फीसदी तक अधिक होता है।
रिसर्च में साबित हो चुका है कि शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं रहने वाली और मोटी महिलाओं में हृदय रोग के मामले ज्यादा सामने आते हैं। पहाड़ की महिलाएं दिन भर दौड़भाग करती हैं। उनका खान-पान व्यवस्थित होता है, जिससे उन्हें अपेक्षाकृत कम खतरा होता है।
- डॉ. अनुराग रावत, कॉर्डियोलॉजिस्ट, एचआईएचटी जौलीग्रांट
ग्रामीण क्षेत्रों में 8 से 10 और मैदानी क्षेत्रों में 25 से 30 फीसदी महिलाओं में हाईपर टेंशन की समस्या होती है। वहीं कोरोनरी आर्टरी डिजीज (सीएडी) के 6 से 8 फीसदी मामले मिलते हैं। अव्यवस्थित जीवन शैली और आराम तलबी की आदत के कारण शहरों में मामले ज्यादा हैं।
- डॉ. बरुन कुमार, कॉर्डियोलॉजिस्ट, एसएमआईएच