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Vikrami Samvat 2080: धरती हुई 195 करोड़ वर्ष पुरानी...बुध राजा और मंत्री होंगे शुक्र, भारत पर ऐसा रहेगा असर

Tue, 21 Mar 2023 12:44 PM IST
अलका त्यागी कौशल सिखौला, अमर उजाला, हरिद्वार

सार

सबसे पुराना संवत है सृष्टि संवत। इसका प्रतिपादन आदि ऋषियों ने किया। शास्त्रीय अवधारणाओं के अनुसार, सृष्टि संवत प्रारंभ हुए 195 करोड़ वर्ष हो गए हैं।
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धरती - फोटो : iStock
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विस्तार
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विक्रमी संवत 2080 बुधवार से प्रारंभ हो रहा है। पिंगल नामा इस संवत के राजा बुध होंगे और मंत्री पद का दायित्व शुक्र निभाएंगे। नव संवत्सर में दो सावन के रूप में अनेक शुभ फल प्रदान करने वाला पुरुषोत्तम मास पड़ रहा है। इस दिन सृष्टि संवत के अनुसार धरती 195 करोड़ वर्ष पुरानी हो जाएगी।

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नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा नाव पर सवार होकर आएंगी। नवरात्र के नौवें दिन भगवान राम का जन्मोत्सव रामनवमी के रूप में 30 मार्च को मनाया जाएगा। उज्जयिनी के राजा विक्रमादित्य के नाम पर प्रचलित वर्तमान विक्रमी संवत के कुल 60 नाम हैं, जो प्रतिवर्ष बदल जाते हैं, लेकिन और भी अनेक महापुरुषों के नाम से संवत्सर चल रहे हैं।

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सृष्टि संवत है सबसे पुराना संवत

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, सबसे पुराना संवत है सृष्टि संवत। इसका प्रतिपादन आदि ऋषियों ने किया। शास्त्रीय अवधारणाओं के अनुसार, सृष्टि संवत प्रारंभ हुए 195 करोड़ वर्ष हो गए हैं। इसका निर्धारण चारों युगों से होता है। आचार्य प्रियवृत पराशर के अनुसार, चारों युग 42 लाख वर्ष में बीतते हैं। मत्स्य पुराण, स्कंद पुराण और गरुड़ पुराण में ही नहीं, कालखंड का विवरण ऋग्वेद में भी उपलब्ध है।

बुधवार से विक्रमी संवत 2080 प्रारंभ हो रहा है। यह संवत ही सर्वत्र प्रचलित है। इस वर्ष का राजा बुध है और मंत्री शुक्र। भारतीय प्राच्य विद्या सोसाइटी के निदेशक डाॅ. प्रतीक मिश्रपुरी बताते हैं कि नया संवत वृश्चिक लग्न में प्रारंभ हो रहा है। नए साल में गुरु का संचार मेष राशि में रहेगा।
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बताया कि बुध और शुक्र का साथ होने के कारण नृत्य, गायन और कला के क्षेत्र में भारत का नाम होगा। नए संवत विवाहों के 70 मुहूर्त निकल रहे हैं। यह संवत मिश्रित फल प्रदान करेगा। संवत के साथ ही नवरात्र प्रारंभ हो रहे हैं।

भारत में महापुरुषों के नाम आज भी कई संवत
भारत में महापुरुषों के नाम से भी कई संवत आज भी प्रचलित हैं। कलियुग के आगामी अवतार कल्कि के नाम से चला कल्कि संवत 5121 वर्ष पुराना है। इसी प्रकार श्रीकृष्ण संवत 5254 वर्ष, सप्तऋषि संवत 5096, बुद्ध संवत 2643, महावीर संवत 2546, शक संवत 1943, हिजरी संवत 1442, फसली संवत 1428, नानकशाही संवत 553 तथा खालसा संवत 322 वर्ष पुराने हैं। ये समस्त संवत आज भी प्रचलित हैं।
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