उत्तराखंड के वीर जांबाजों ने अपने बेटों को भी बनाया फौजी
1971 के जांबाजों ने एक नहीं बल्कि कई अन्य युद्ध भी लड़े। खास बात यह है कि विभिन्न युद्ध लड़ने के बाद भी इन वीर जांबाजों ने अपने बेटों को फौजी बनाया। लेफ्टिनेंट कर्नल राकेश चंद्र कुकरेती के दो जुड़वा बेटे हैं। कुकरेती की पत्नी ईरा कुकरेती के मुताबिक उनके दोनों बेटे कार्तिकेय और अर्थ कुकरेती सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल हैं। वहीं, मेजर नारायण सिंह पिलखवाल के पुत्र भगवंत सिंह पिलखवाल भी सेना से कर्नल के पद से सेवानिवृत्त हैं।
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उत्तराखंड के इतने सैनिकों ने दिया था सर्वोच्च बलिदान
1971 के भारत-पाक युद्ध में उत्तराखंड के 248 वीर सैनिकों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए देश के लिए अपनी शहादत दी थी। इसमें अल्मोड़ा जिले के 23, बागेश्वर के 24, चंपावत के आठ, चमोली के 31, देहरादून के 42, लैंसडाउन के 17, नैनीताल के 11, पौड़ी के 16, पिथौरागढ़ के 48, रुद्रप्रयाग का एक, टिहरी के नौ, ऊधमसिंह नगर के छह और उत्तरकाशी के एक जवान ने शहादत दी थी।