16 दिसंबर के दिन ही पाकिस्तान के लेफ्टिनेंट जनरल एके नियाजी ने करीब नब्बे हजार सैनिकों के साथ भारत के लेफ्टिनेंट जनरल जसजीत अरोड़ा के सामने आत्मसमर्पण किया था। इस दौरान जनरल नियाजी ने अपनी पिस्तौल समर्पित की थी।
यह पिस्तौल और कॉफी टेबल बुक आज भी भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में सुरक्षित है। जनरल अरोड़ा ने यह पिस्टल आईएमए के गोल्डन जुबली वर्ष 1982 में अकादमी को प्रदान की थी। इसी युद्ध से जुड़ी दूसरी वस्तु पाकिस्तानी ध्वज है, जो आईएमए में उल्टा लटका हुआ है।
इस ध्वज को भारतीय सेना ने पाकिस्तान की 31 पंजाब बटालियन से युद्ध के दौरान कब्जे में लिया था। युद्ध की एक ओर निशानी कॉफी टेबल बुक कर्नल (रिटायर्ड) रमेश भनोट ने 38 वर्ष बाद जून 2008 में आईएमए को सौंपी थी।