लेकिन बाकी हुए नुकसान से निपटने के लिए राज्य सरकार के पास खुद के संसाधनों को जुटाने के सिवाय दूसरा विकल्प नहीं है। लॉकडाउन के दौरान राज्य सरकार को खनन, परिवहन, पर्यटन, राजस्व सेक्टर में करीब 1760 करोड़ के राजस्व की हानि हुई है। वित्त विभाग के सूत्रों के मुताबिक, इन सेक्टरों में सुधार तो है, लेकिन कोविड के प्रभाव से ये पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाए हैं।
कृषि क्षेत्र को नुकसान नहीं
उनियाल जो प्रदेश के कृषि मंत्री भी हैं, का कहना है कि कोविड से प्रदेश के कृषि क्षेत्र को बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा। लेकिन आमदनी अर्जित करने वाले सरकार के कई क्षेत्रों पर इसका बहुत बुरा असर पड़ा है।
लॉकडाउन में राज्य सरकार को हुई राजस्व हानि की भरपाई के लिए उपसमिति ने अब तक कई सुझाव दिए हैं। हम परिस्थितियों का लगातार अध्ययन कर रहे हैं और उसके आधार पर अपनी राय सरकार के समक्ष रख रहे हैं। स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए कुछ सुझावों पर योजनाएं शुरू हो चुकी हैं। हमारी कोशिश आपदा को अवसर में बदलने की है इस दिशा में ग्रामीण और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के गंभीरता से प्रयास शुरू हो गए हैं।
- सुबोध उनियाल, कैबिनेट मंत्री व अध्यक्ष, मंत्रिमंडलीय उपसमिति
अब प्रश्न यही है कि सरकार की अर्थव्यवस्था की गाड़ी कैसे चल रही है। दरअसल, इसमें केंद्रीय अनुदान का सबसे अहम योगदान है। इस वित्तीय वर्ष में सरकार ने 16 हजार करोड़ रुपये केंद्रीय अनुदान प्राप्त होने का अनुमान लगाया है।
अक्तूबर तक राज्य के खाते में 8500 करोड़ आ चुके हैं। यानी अनुमान के आधे से अधिक अनुदान मिल चुका है। जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में अक्तूबर तक अनुदान की राशि महज 39 प्रतिशत थी। इसके अलावा जीएसटी और समय समय पर लोन के जरिये अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिश हो रही है।
अक्तूबर तक कहां कितना झटका लगा
-5386 करोड़ जीएसटी के सालाना अनुमान के सापेक्ष 2073 करोड़ मिला। पिछले साल से आठ प्रतिशत कम।
-25 करोड़ भूराजस्व के सापेक्ष पांच करोड़ ही मिल सका।
-2000 करोड़ सेल टैक्स मिलने की उम्मीद थी, लेकिन 881 करोड़ खजाने में आया।
-3539 करोड़ नान टैक्स रेवेन्यू का लक्ष्य था, लेकिन 1233 करोड़ ही मिले।