इसी लड़ाई में बारूदी सुरंग रिकवरी के समय सूबेदार लक्ष्मण सिंह बिष्ट विस्फोट की चपेट में आ गए। उनके पैर में छर्रे लगे, वह घायल हो गए। 13, 14 दिसंबर 1971 को उन लोगों को पाकिस्तान पर फतह की सूचना मिली। तब भारतीय सैनिक लाहौर तक पहुंच गए थे।
सूबेदार लक्ष्मण सिंह बिष्ट की बहादुरी के लिए वर्ष 1982 में तत्कालीन राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी ने उन्हें सम्मान पत्र दिया था और उनकी वीरता को सराहा था। वर्ष 1979 में सेना से रिटायर बिष्ट का परिवार जिला मुख्यालय के कृष्णापुरी में रहता है।
जांबाज बिष्ट के परिवार में सैन्य परंपरा कायम
वर्ष 1971 के भारत-पाक युद्ध के हीरो सूबेदार लक्ष्मण सिंह बिष्ट के परिवार ने सैन्य परंपरा को कायम रखा है। उनके बड़े पोते मोहित बिष्ट 17 गार्ड लेफ्टीनेंट के पद पर कार्यरत हैं। छोटे पोते रोहित बिष्ट मर्चेंट नेवी में कार्यरत हैं।