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अमर उजाला एक्सक्लूसिव : यूटीयू के पूर्व कुलपतियों के कार्यकाल की होगी विजिलेंस जांच

Sat, 15 Feb 2020 03:57 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal अरुणेश पठानिया, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • पीएचडी के लिए नियमों में अनदेखी सहित हैं कई गंभीर आरोप
  • मुख्यमंत्री के अनुमोदन के बाद शासन ने जारी किया आदेश
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यूटीयू - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) के पूर्व कुलपतियों के कार्यकाल में पीएचडी के लिए नियमों की अनदेखी सहित नियुक्तियों और अन्य मामलों में हुईं गड़बड़ियों की विजिलेंस जांच होगी। यूटीयू में नियमों को ताक पर रख अभ्यर्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। मुख्यमंत्री की अनुमति के बाद शासन ने जांच आदेश जारी कर दिए हैं।

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यूटीयू पर पीएचडी के नियमों की अनदेखी सहित अन्य गड़बड़ियों के आरोप लगते रहे हैं। बीते वर्ष राजभवन के सख्त निर्देश पर शासन ने यूटीयू से गड़बड़ी पर रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन विवि ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। इसके बाद शासन ने मुख्यमंत्री से विजिलेंस जांच की अनुमति मांगी थी।

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आरोप है कि कुछ उम्मीदवारों को बगैर प्रवेश प्रक्रिया के पीएचडी के लिए पंजीकृत किया गया और डेढ़ साल में ही उन्हें उपाधि दे दी गई। इसके अलावा वर्ष 2009 और 2010 में उन लोगों को उपाधि दी गई, जिनका विभिन्न विश्वविद्यालयों से यहां ट्रांसफर हुआ था।

वर्ष 2010 में वाइवा और 2011 में पंजीकरण का भी आरोप लगा था। वर्ष 2017 में पीएचडी प्रवेश परीक्षा में भी गड़बड़ी का आरोप लगा था, लेकिन इस मामले में अब तक किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है।
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विवि प्रशासन पर हैं कई और आरोप

विवि प्रशासन पर पीएचडी घोटाले के अलावा नियुक्ति में मानकों की अनदेखी, अफसरों के परिवारीजनों व रिश्तेदारों को नियुक्ति और कुछ खरीद टेंडरों में गड़बड़ी के आरोप लगते रहे हैं।

पूर्व राज्यपाल डॉ.कृष्णकांत पाल ने वर्ष 2016 में वित्तीय गड़बड़ियों और नियुक्तियों में गड़बड़ी को लेकर तत्कालीन मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह से जांच करवाई थी, इसके बाद राजभवन के निर्देश पर वर्ष 2019 में भी विभागीय जांच हुई।

यूटीयू के पूर्व कुलपतियों के कार्यकाल की विजिलेंस जांच के आदेश दे दिए गए हैं। विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर कई गंभीर आरोप लगे हैं, जिनकी गंभीरता को देखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया है।
- ओम प्रकाश, अपर मुख्य सचिव, तकनीकी शिक्षा
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