प्रदेश के शासकीय और अशासकीय स्कलों में कार्यरत जिन टीचरों के शैक्षणिक या अन्य प्रमाण पत्रों के फर्जी अथवा अमान्य संस्थानों के होने की शिकायत मिल रही है, उनकी जांच विजलेंस से कराई जाएगी। साथ ही अन्य संदिग्ध टीचरों के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की भी जांच होगी। इस संबंध में शुक्रवार को शासन ने विजलेंस जांच की सिफारिश कर दी।
अपर मुख्य सचिव डा.रणवीर सिंह ने कहा कि बेसिक के समस्त सरकारी स्कूलों के टीचरों के शैक्षिक, मूल निवास, जाति, नियुक्ति संबंधित आदि प्रमाण पत्रों की जांच की जाएगी। उन्होंने बताया कि टीचरों के शैक्षिक प्रमाण पत्र फर्जी होने की बहुत अधिक शिकायतें सामने आ रही हैं। विभाग को जिन टीचरों की शिकायतें मिली हैं उन टीचरों के साथ ही अन्य टीचरों के प्रमाण पत्रों की भी विजिलेंस से जांच की सिफारिश की गई है।
इस मामले को अमर उजाला ने एक अभियान के तौर पर प्रमुखता से उठा रखा है। दरअसल, अमर उजाला को विभिन्न स्रोतों से लगातार जानकारी मिल रही है कि प्रदेश के शासकीय और अशासकीय विद्यालयों में बड़े पैमाने पर फर्जी और अमान्य संस्थानों के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों पर लोग नौकरी कर रहे हैं।
यह सब शिक्षा विभाग और अशासकीय स्कूलों के मामले में स्कूल प्रबंधन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मिलीभगत से हो रहा है। कुछ मामले शिकायत मिलने पर पकड़े गए, अव्वल तो उनमें काफी कम लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई और उन लोगों पर हाथ नहीं डाला गया, जिनकी मिलीभगत से यह गोरखधंधा चल रहा है।
34 टीचर किए बर्खास्त
डिग्री फर्जी, नौकरी असली समाचार श्रृंखला शुरू होने के बाद से अब शासन हरकत में आया है। शुक्रवार को शिक्षा विभाग के अधिकारियों की बैठक के बाद अपर मुख्य सचिव ने बताया कि टीचरों के शैक्षिक प्रमाण पत्र फर्जी होने की लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं।
कुछ के जाति, निवास और शैक्षिक प्रमाण पत्र फर्जी होने की शिकायत हैं। वहीं, कुछ मामले किसी और के प्रमाणपत्रों पर नियुक्ति के भी हैं। बैठक में शिक्षा विभाग के अधिकारियों से उन टीचरों के बारे में जानकारी ली गई, जिनके शैक्षिक प्रमाण पत्र फर्जी मिलने की शिकायत मिली है। बैठक में इन टीचरों के अर्हता प्रमाण पत्रों, नियुक्ति आदेश, जांच रिपोर्ट एवं संबंधित अभिलेख तलब किए गए थे। आगे मामले की विस्तृत जांच के लिए यह प्रकरण अब विजलेंस की भेजा जाएगा।
अपर मुख्य सचिव डा.रणवीर सिंह ने बताया कि विभाग को 79 टीचरों के शैक्षिक प्रमाण पत्र फर्जी होने की शिकायत मिली थी। जांच में 34 टीचरों के प्रमाण पत्र फर्जी मिले हैं। इन टीचरों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं, वहीं अन्य टीचरों के प्रमाण पत्रों की जांच की जा रही है। जिन टीचरों की सेवाएं समाप्त की गई हैं
अब तक इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हुई न ही विभाग की ओर से रिकवरी की गई है। अब इन टीचरों की विजिलेंस से जांच कराई जाएगी। विजिलेंस प्रकरण में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करेगी। प्रकरण में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी।