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अपर सचिव पर आरोप लगाने वाली 'अंडर ग्राउंड'

Fri, 06 Dec 2013 12:19 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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अपर सचिव जेपी जोशी प्रकरण में ट्रांजिट बेल खत्म होते ही पुलिस युवती को पूछताछ के लिए बुलाएगी। पुलिस गुरुवार को उसकी लोकेशन खंगालने में जुटी रही, लेकिन कुछ पता नहीं चला।
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पीड़िता का मोबाइल नंबर भी बंद चल रहा है। एएसपी ममता बोहरा के नेतृत्व में पुलिस की जांच टीम अब ब्लैकमेलिंग के आरोपियों की धरपकड़ में दिल्ली और एनसीआर में पुलिस टीम दबिश में लगी हैं।

खुफिया विभाग भी नजर बनाए हुए
मामला हाईप्रोफाइल और शासन के अधिकारी से जुड़ा होने से खुफिया विभाग भी नजर बनाए हुए है। पल-पल की जानकारी पुलिस व शासन के अधिकारियों को भेजी जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, पुलिस को युवती की ट्रांजिट बेल की अवधि खत्म होने का इंतजार है। उसके बाद पुलिस युवती को पूछताछ के लिए बुलाएगी। अगर युवती नहीं मिली तो उसके शिमला बाईपास स्थित पुराने पते पर समन भेजे जाएंगे।
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सूत्रों के मुताबिक इसके बाद भी युवती सामने नहीं आई तो उसके खिलाफ वारंट जारी किया जा सकता है।

टीवी पर जमी रहीं जोशी की नजरें
गुरुवार को जेल में अपर सचिव जेपी जोशी की नजरें टीवी पर टिकी रहीं। सूत्रों के अनुसार, जेल की लाइब्रेरी में जोशी दिनभर कई बार टीवी पर जमानत अर्जी पर फैसले की खबर देखने आते रहे।

इस दौरान उन्होंने अखबारों में मामले पर दी जा रही खबरें भी पढ़ीं। गुरुवार को जेल में उनसे मिलने के लिए कोई नहीं आया।

एसटीएफ ने दी जांच रिपोर्ट
एसटीएफ ने तीस से अधिक मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल और लोकेशन के बारे में जांच टीम को दस्तावेज सौंपे हैं।

इनमें युवती और अपर सचिव के मोबाइल नंबरों की लोकेशन, किन-किन तिथियों को लोकेशन एक साथ रही, नैनीताल में बताए गए घटनास्थल पर ब्लैकमेलिंग के आरोपियों की लोकेशन, पीड़ित युवती के शिमला बाईपास स्थित आवास के आसपास जुड़ी कड़ियों के बारे में जिक्र है।

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जांच टीम इसके आधार पर भी आरोपियों पर शिकंजा कसने और अदालत में मजबूत आधार पेश करने के दस्तावेज तैयार कर रही है।

तीन करोड़ की ब्लैकमेलिंग का आरोप
यौन शोषण और महिला को धमकी देने के आरोपी अपर सचिव जेपी जोशी की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत से जमानत खारिज होने के बाद जोशी ने गुरुवार को जिला न्यायालय में जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल किया।

जिस पर शनिवार सात दिसंबर को सुनवाई होगी। जोशी ने जमानत के लिए पीड़िता पर तीन करोड़ की ब्लैकमेलिंग और उसके पूर्व के पारिवारिक मामलों को आधार बनाया है।

यौन शोषण के आरोपी अपर सचिव ने पीड़ित महिला के पारिवारिक न्यायालय में चल रहे वाद को आधार बनाकर यह कहा है कि पीड़िता वर्ष 2011 में एक टीवी चैनल में काम करती थी।

जो पढ़ी लिखी है और प्रोफेशनल कोर्स करवाने में पूर्ण रूप से सक्षम है। ऐसे में वे नौकरी की मांग कैसे कर सकती है। वहीं जोशी ने यह भी कहा कि उससे अश्लील सीडी के बदले तीन करोड़ की मांग की गई।

जिस पर पहले वे एसपी देहात जगदीश भंडारी से और फिर 20 नवंबर को इस मामले को लेकर एसएसपी से मिले। उन्होंने एसएसपी से प्रकरण में उच्च स्तरीय जांच की मांग की।

22 नवंबर को उन्हें परिचितों से पता चला कि अश्लील सीडी चलाई जा रही है। इस पर उन्होंने बसंत विहार थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। जोशी का कहना है कि महिला के दिल्ली में बड़े लोगों से संबंध हैं।

तो क्या जोशी की शिकायत पर हरकत में नहीं आई पुलिस
जोशी मामले में 20 नवंबर को एसएसपी दून से मिलकर ब्लैकमेलिंग की शिकायत करने का दावा कर रहे हैं। उनका कहना है कि पहले वे एसपी देहात जगदीश भंडारी से मिले।

सवाल यह है कि यदि अपर सचिव गृह ने पुलिस के दो अधिकारियों से मामले की शिकायत की तो मामले में शिकायत होते ही पुलिस हरकत में क्यों नहीं आई। तुरंत ही मामला दर्ज कर कार्रवाई क्यों नहीं हुई, या फिर यू कहें कि मामले में अब कुछ ओर नया मोड़ दिया जा रहा है।
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