बॉलीवुड के ट्रैजिडी किंग दिलीप कुमार हमेशा ही कलाकारों के लिए प्रेरणा बने रहे। उनका पूरा जीवन कला के लिए समर्पित रहा। दिलीप कुमार हर किरदार में पूरी तरह डूब जाते थे। उनकी एक्टिंग में गूढ़ता थी। उन्होंने कभी राजनीतिक टिप्पणी नहीं की। यही उनकी सबसे बड़ी खूबी रही। यह कहना है 48 से अधिक फिल्मों में काम कर चुके शिव नारायण सिंह रावत उर्फ शिब्बू का। बकौल शिब्बू दिलीप साहब खुद अदाकारी की पाठशाला थे।
शिव नारायण सिंह रावत ने बताया कि वे 45 सालों से फिल्म जगत से जुड़े हैं। शुरुआत से ही दिलीप साहब उनके प्रेरणास्रोत रहे। फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज कलाकार धर्मेंद्र, मनोज कुमार और सदी के महानायक अमिताभ बच्चन भी उनके फेन हैं। शिव नारायण ने बताया कि 1976 में वे फिल्म सिटी मुंबई पहुंचे। उन्होंने पहली बार एसएल स्टूडियो ट्रॉम्बे में दिलीप साहब को देखा था।
1995 में वे दूरदर्शन के सीरियल प्रेम सुधा की शूटिंग फिल्म सिटी में कर रहे थे। इस दौरान दिलीप साहब भी वहां पहुंचे। शिब्बू बताते हैं कि इस दौरान वे किरदार की पोशाक में थे। उनका दिलीप साहब से सामना हुआ तो उन्होंने पूछा कि आप एक्टर हैं। उनके मुंह से यह शब्दों को सुनकर शिब्बू का आत्मविश्वास बढ़ गया और उन्होंने दिलीप साहब के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। इस पर दिलीप कुमार उनकी पीठ थपथपाकर चले गए।
शिब्बू का कहना है कि दिलीप कुमार को ट्रैजिडी किंग कहा जाता है, लेकिन वे ऐसा नहीं मानते। फिल्म राम और श्याम में उन्होंने दो किरदार निभाए। एक चुलबुले और दूसरा गंभीर बेहद गंभीर था। लोग कॉमेडी को कठिन मानते हैं, लेकिन दिलीप साहब उसे भी सहजता से निभाते थे। इसके बाद दिलीप कुमार से मुलाकात उनके घर पर हुई। शिब्बू बताते हैं कि फिल्म निर्देशक भीमेश्वर राव दिलीप कुमार के छोटे भाई के दोस्त थे। भीमेश्वर के साथ उन्हें भी दिलीप कुमार के घर जाने का मौका मिला। मुलाकात के दौरान उन्होंने दिलीप कुमार से शालीनता और बोलने की कला सीखी।
शिब्बू ने बताया कि उनके इंस्टीट्यूट में ट्रेनिंग लेने के लिए आने वाले बच्चों के लिए पहला सबक दिलीप कुमार ही होते हैं। उन्होंने बच्चों को सिखाया है कि अगर बड़ा एक्टर बनना है तो दिलीप कुमार के जीवन संघर्ष को जानने की कोशिश करें। उन्होंने दिलीप कुमार को शाकुंतल फिल्म इंस्टीट्यूट की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की।