पर्यटकों की सुविधा के लिए बस, टैक्सी की खरीद, यात्रा मार्गों व पर्यटन स्थलों पर फास्ट फूड केंद्र, रेस्टोरेंट की स्थापना, मोटर यानों की मरम्मत के लिए वर्कशॉप, गैराजों की स्थापना व सुधार, यात्रा मार्गों पर साधना केंद्र या मोटलनुमा आठ से 10 कमरों का आवासीय भवन, पेइंग गेस्ट हाउस, रिवर राफ्टिंग, ट्रैकिंग मार्गों पर टैंट स्थापना, प्रतीकात्मक वस्तुओं को विक्रय केंद्र, पीसीओ निर्माण, साहसिक खेलों के उपकरणों की खरीद।
योजना में शामिल किए गए नए कार्य
क्याकिंग, नाव क्रय एवं संचालन, पर्यटन हेतु टेरेन बाइक्स अधिकतम दस, कैरावैन, मोटर होम टूरिज्म, एंगलिग उपकरणों का क्रय, स्टार गेजिंग एवं बर्ड वॉचिंग के लिए उपकरणों की खरीद, लॉन्ड्री की स्थापना, बेकरी की स्थापना, सोबिनियर केंद्र की स्थापना, फ्लॉटिंग होटल का निर्माण, ट्रैकिंग उपकरणों, सूट जैकेट आदि को किराए पर उपलब्ध कराए जाने के लिए केंद्रों की स्थापना, हर्बल टूरिज्म।
अब तक के लाभार्थी
जनपद लाभार्थी
देहरादून 470
उत्तरकाशी 546
हरिद्वार 478
टिहरी 501
पौड़ी 501
चमोली 600
रुद्रप्रयाग 415
अल्मोड़ा 538
बागेश्वर 504
चंपावत 199
ऊधमसिंह नगर 226
कुल लाभार्थी 6267
योजना के तहत कुछ ऐसे पहलुओं को शामिल किया गया है, जो पर्यटन की दृष्टि से काफी आवश्यक हैं। योजना का दायरा बढ़ने से न केवल प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि पलायन पर भी रोक लगेगी। स्वरोजगार की दिशा में यह योजना अब काफी सहायक सिद्ध होगी।
- एसएस सामंत, वरिष्ठ शोध अधिकारी, पर्यटन विकास परिषद